ईरान-अमेरिका मध्यस्थता कराने की कोशिश में बुरा फँसा पाकिस्तान, खुली आसिम मुनीर की सीक्रेट डील

पश्चिम एशिया में लगभग पाँच महीने से भड़की ईरान-अमेरिका जंग अब वैश्विक ऊर्जा, समुद्री व्यापार और महाशक्तियों की प्रतिष्ठा की निर्णायक लड़ाई बन चुकी है। इसी बीच पाकिस्तान एक बार फिर स्वयं को मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसका यह नया दांव शुरू से ही कमजोर दिखाई देता है। पहले भी अनेक कूटनीतिक मोर्चों पर संतुलन साधने में विफल रहा इस्लामाबाद अब चीन के इशारे पर ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई वार्ता को पुनर्जीवित करने की कवायद कर रहा है।

ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी की हालिया पाकिस्तान यात्राएं और शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों ने इस प्रयास को गति तो दी है, लेकिन ज़मीनी हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। एक ओर ईरान समर्थित हूती संगठन सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है, दूसरी ओर अमेरिका लगातार सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में सऊदी अरब, चीन, ईरान और अमेरिका, चारों के परस्पर विरोधी हितों के बीच फंसा पाकिस्तान किसी भी पक्ष का भरोसा पूरी तरह नहीं जीत पा रहा। पाकिस्तान भले मध्यस्थता का प्रयास कर रहा है, लेकिन संघर्ष की लगातार बढ़ती तीव्रता, समुद्री नाकाबंदी और क्षेत्रीय ध्रुवीकरण को देखते हुए यह पहल सफल होने की संभावना बेहद क्षीण दिखाई देती है।

दिलचस्प बात यह भी है कि पाकिस्तान की यह नई कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय सामने आई है, जब उसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को लेकर एक और बड़ा दावा चर्चा में बना हुआ है। हम आपको बता दें कि एक अंतरराष्ट्रीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर ने इसी वर्ष मार्च में सऊदी अरब और ईरान के बीच एक कथित गुप्त युद्धविराम समझौता कराने में भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह समझौता ईरानी तेल के अनौपचारिक निर्यात को सुगम बनाए रखने के बदले कराया गया, जिसमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े शीर्ष अधिकारियों और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों के आर्थिक हित भी जुड़े बताए गए हैं।

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