खुली अदालत में बहस होना न्यायसंगत होगा-कपिल सिब्बल के साथ SC पहुंचे खालिद

दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में 5 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद सोशल एक्टिविस्ट उमर खालिद ने एक बार फिर से न्याय के लिए देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है। खालिद ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 जनवरी 2026 को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करने के फैसले के खिलाफ एक पुनर्विचार याचिका दायर की है। इस याचिका के माध्यम से उन्होंने ना केवल पिछले फैसले की समीक्षा की मांग की बल्कि एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक अनुरोध भी किया।

उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने 13 सितंबर 2020 को गैर कानानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था। तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं। 13 अप्रैल 2026 को दायर अपनी ताजा याचिका में खालिद ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि उनकी पुनर्विचार याचिका पर इन चेंबर के बजाय ओपन कोर्ट यानी खुली अदालत में सुनवाई की जाए।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया। सिब्बल ने तर्क दिया किक क्योंकि यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लंबे समय तक जेल में रहने से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस पर खुली अदालत में बहस होना न्यायसंगत होगा।

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