छत्तीसगढ़ के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव ने विभाग में ‘कसावट’ लाने के लिए ताश के पत्तों की तरह 34 अफसरों को यहां-वहां फेंट दिया है। गजब का प्रबंधन है—कल तक जो 6 एक्ज़ीक्युटिव इंजीनियर लापरवाही और गलत रिपोर्टिंग के लिए ‘निलंबित’ थे, आज वही ‘बहाल’ होकर विकास की गंगा बहाएंगे। शायद मंत्रालय को लगता है कि सस्पेंशन की अवधि में इन अफसरों को कोई दिव्य ज्ञान प्राप्त हो गया है। डेढ़ साल से फंड के सूखे के कारण, ठेकेदार और सप्लायर काम छोड़कर बैठे हैं, लेकिन मंत्री जी का मानना है कि बजट से ज्यादा जरूरी ‘चेहरों’ का बदलना है। पाइप में पानी हो न हो, दफ्तरों में कुर्सियां जरूर घूमनी चाहिए। बिना पैसे के काम कैसे होगा, यह तो जादूगर ही जाने, पर फिलहाल तो बहाली और तबादलों के ‘मरहम’ से विभाग की सुस्ती दूर करने का अनोखा प्रयोग जारी है। आप इस बारे में क्या कहेंगे ?
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , दैनिक पूरब टाइम्स


