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Sunday, March 22, 2026
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“रेरा” रायपुर का ऐतिहासिक आदेश-सफायर ग्रीन्स परियोजना के क्लब हाउस का स्वामित्व अब निवासियों की सोसाइटी के हाथों में

रेरा द्वारा बिल्डर को क्लब हाउस व सभी कॉमन एरिया सफायर ग्रीन्स की अपेक्स सोसाइटी को सौंपने एवं समस्त व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने का निर्देश दिया गया. सफायर ग्रीन्स विधान सभा रोड पर स्थित प्रीमियम टाउनशिप है जिसमें 500 से अधिक परिवार निवास करते हैं। सोसाइटी के अध्यक्ष दिनेश अवस्थी ने बताया कि बिल्डर, हमारे परिसर में जिम, गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हॉल और क्लबहाउस जैसी सामुदायिक सुविधाओं का व्यावसायिक उपयोग कर रहा था और हमारे अनेक निवेदन पर भी सोसाइटी को नहीं सौंप रहा था. अब रेरा का यह फैसला , अन्य हौसिंग सोसाइटियों के लिये भी मील का पत्थर साबित होगा

पूरब टाइम्स, रायपुर. पिछले दिनों छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (RERA), रायपुर ने विधानसभा रोड स्थित “सफायर ग्रीन्स” परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रकरण में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए परियोजना के समस्त कॉमन एरिया तथा क्लब हाउस का संपूर्ण प्रबंधन और नियंत्रण परियोजना में शामिल समस्त सोसाइटी की एक अपेक्स सोसाइटी गठित कर उसे हस्तांतरण करने का आदेश पारित किया है। यह आदेश प्रकरण क्रमांक M-PRO-2025-02733 में पारित किया गया, जिसमें आवेदक सैफायर ग्रीन्स विला रेजिडेंशियल को ऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा अधिवक्ता अभिनव कार्डेकर के माध्यम से बिल्डर “ मे. ओम बिल्डर्स एवं मे. ओम कंस्ट्रक्शन “ के विरुद्ध परियोजना के समस्त कॉमन एरिया, सुविधाओं तथा क्लब हाउस के विधिवत हस्तांतरण न होने और अधूरी मूलभूत सुविधाओं को लेकर परिवाद दायर किया था।

सोसाइटी का आरोप था कि बिल्डर ने अब तक परियोजना का प्रशासनिक एवं वित्तीय हस्तांतरण नहीं किया, जबकि जल निकासी, विद्युत आपूर्ति, सड़क रखरखाव और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे बुनियादी कार्य भी अधूरे पड़े हैं। साथ ही बिल्डर ने परिसर में जिम, गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हॉल और क्लबहाउस जैसी सामुदायिक सुविधाओं का व्यावसायिक उपयोग कर कानून का उल्लंघन किया। बिल्डर ने निवासियों से क्लब एवं मेंटेनेंस शुल्क तो वसूल किया, पर उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार नहीं किया ।

प्राधिकरण ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद पाया कि बिल्डर द्वारा परियोजना में व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं, जो Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। प्राधिकरण ने बिल्डर के इस तर्क को अस्वीकार कर दिया कि विक्रय विलेख में क्लब हाउस का स्वामित्व और आधिपत्य हमेशा बिल्डर के पास रहेगा और क्रेता निवासियों को इस बात की जानकारी शुरू से थी। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि क्लब हाउस कॉमन सुविधाओं का अभिन्न हिस्सा है और इस पर बिल्डर का किसी भी प्रकार का स्वामित्व या अधिकार नहीं हो सकता। इस आधार पर बिल्डर का तर्क खारिज करते हुए क्लब हाउस को निवासियों की अपेक्स समिति को हस्तांतरित करने का आदेश दिया गया है। प्राधिकरण ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि परिसर में स्वच्छ जल की अनुपलब्धता, खराब ड्रेनेज सिस्टम, प्रकाश व्यवस्था में कमी तथा सामुदायिक सुविधाओं के व्यावसायिक उपयोग को गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है। आदेश में बिल्डर द्वारा पंजीकृत Real Estate Project Registration No. PCGRERA290319000955 की शर्तों के उल्लंघन का भी उल्लेख करते हुए सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

समिति के अध्यक्ष दिनेश अवस्थी ने बताया कि फैसले से सभी निवासियों में हर्ष की लहर है और अब मूलभूत सुविधाओं का निवासी और बेहतर तरीके से कम बजट में उपयोग कर पाएंगे। समिति के सेक्रेटरी राजीव जैन ने बताया कि यह फैसला रायपुर शहर की अन्य टाउनशिप के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। अनुराग पांडे, महेंद्र बाफना एवं सुनील अग्रवाल ने रेरा कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। रेरा कोर्ट के फैसले से सभी निवासियों में खुशी की लहर है।

रेरा रायपुर का यह निर्णय न केवल सफायर ग्रीन्स परियोजना के निवासियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह उन सभी परियोजनाओं के लिए एक नज़ीर भी माना जा रहा है जहाँ बिल्डर द्वारा सोसाइटी को नियंत्रण सौंपने में टालमटोल की जाती है। इस आदेश से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और खरीदारों के अधिकारों को नया बल मिलने की उम्मीद है।

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