कचरा घोटाला छिपाने के लिए क्या सफाई कर्मियों के अधिकारों का किया जा रहा है हनन ?
सफाई व्यवस्था का दैनिक हिसाब किताब नहीं देकर, क्या की जा रही हैं गड़बडियां ?
निगम कोष से सफाई कार्य के लिए आहरित किए जाने वाले राशि का हिसाब पब्लिक डोमेन में कहां है ?
पूरब टाइम्स, भिलाई. नगर पालिका निगम भिलाई व रिसाली के सफाई कर्मियों के हक़ के हनन का एक मामला, सहायक श्रम आयुक्त दुर्ग में चल रहा हैं. इस मामले की पेशियों में नगर निगम भिलाई व निगम रिसाली की तरफ से श्रमिकों के रिकॉड्र्स प्रस्तुत नहीं किये जा रहे हैं. सूत्रों से मालूम हुआ हैं कि उन रिकॉड्र्स के आधार पर यह जांच होगी कि उन सफाई श्रमिकों को सरकारी श्रम नियमों के आधार पर भुगतान व सुविधाएं दीं जा रही हैं या नहीं? जानकारी यह भी प्राप्त हुई हैं कि इस मामले में निगम कमिश्नर व सफाई अधिकारी को भी नोटिस दीं गई हैं. बताया यह जा रहा हैं कि इन रिकॉर्डस से अनेक राजनेता भी संदेह के घेरे में आएंगे, जिनकी जानकारी व निर्देश से अनेक सफाई कर्मियों को सुविधाविहीन भुगतान कर दिया जाता हैं. नाम ना छापने की शर्त पर निगम के एक कर्मी ने बताया हैं कि गहनता से जांच करने पर फज़ऱ्ी हाजरी व भुगतान के मामले का भांडा फोड़ हो सकता हैं. इस मामले की जानकारी भिलाई व रिसाली, दोनों, के महापौर को हैं परन्तु वे इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच क्यों नहीं करवा रहे हैं, इसका खुलासा भविष्य में हो ही जाएगा. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट..
भिलाई और रिसाली निगम का कचरा मामला कांग्रेस की छवि धूमिल कर रहा है ।
निगम कोष का बड़ा हिस्सा साफ सफाई पर खर्च होता है इसलिए निगम कचरा ठेका महापौर और एमआईसी स्वास्थ्य के लिए फायदे का सौदा माना जाता है. भिलाई और रिसाली निगम मामले में यह सौदा पारदर्शिता के अभाव में प्रश्नांकित स्थिति में है. गौर तलब रहे कि निगम सफाई मामले में महापौर की खामोशी बयान कर रही है कि कचरा मामले में महापौर बेहद संतुष्ट है और सफाई ठेकदार और महापौर के मध्य का प्रशासकीय रिश्ता बेहद मधुर है, जिसका कारण क्या है, जनता भली भांति जानती है ।
क्या सफाई कर्मियों को नियोजित करने वाला ठेकेदार, महापौर की विशेष कृपा से कर रहा श्रमिक अधिकारों का हनन?
साफ़ सफाई घोटाले मामलों में महापौर रिसाली और भिलाई की खामोशी भले ही उनकी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरी कर रहीं हो लेकिन भिलाई और रिसाली निगम महापौर की खामोशी सफाई कर्मियों के श्रमिक अधिकारों का हनन करते का प्रमुख कारण बन गई है. ऐसा लगता हैं कि सफाई ठेकेदारों को महापौर का विशेष सहयोग प्राप्त है और सफाई ठेकदार मनमानी करने के लिए महापौर द्वारा संरक्षण भी प्राप्त है. इसलिए सफाई ठेकेदारों द्वारा नियोजित श्रमिकों मजदूरों की दैनिक मजूरी का प्रमाणित हिसाब किताब उपलब्ध नहीं कराया जाता है जिसके कारण सफाई ठेकेदारों को बड़ा घोटाला करने का अवसर स्वाभाविक तौर पर मिल रहा है ।
पकड़ में आयेगी गड़बडिय़ां और अनियमितता
सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे ने चर्चा में बताया कि सफाई ठेके की गड़बडिय़ों को दो स्तरों पर पकड़ा जा सकता है,पहला तरीका है दैनिक हिसाब किताब जिसे ठेकदार अनुबंध शर्तों के आधार पर रोजाना निगम को देने को बाध्य होता है इसके मॉनिटरिंग पार्षद स्तर से की जाय. गौर तलब रहे कि इसी के आधार पर सफाई ठेकेदारों को निगम द्वारा भुगतान किया जाता है, जिसे पार्षद तुरंत पकड़ सकते हैं. गड़बडिय़ां पकडऩे का दूसरा आधार है ठेकदारों द्वारा नियोजित श्रमिकों की संख्या और उनके कौशल के आधार पर किया जाने वाला निगम कोष से भुगतान. भिलाई और रिसाली निगम आयुक्त इन जानकारियों को सार्वजनिक कर पारदर्शिता के दायरे में नहीं ला रहे है जो कि इस बात को कहे जाने का आधार बनाते है कि सुनियोजित तरीके से गड़बडिय़ां की जा रहीं है, जिसको पकडऩे की पहल उनके द्वारा की जा रहीं है ।
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता


