रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कलेक्टर–डीएफओ संयुक्त कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के वन प्रबंधन, तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित और ग्रामीण आजीविका पर विस्तृत चर्चा की गई। नौ घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में मुख्यमंत्री और वन मंत्री के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक निर्णय लिए गए।
तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए त्वरित भुगतान और डिजिटलीकरण
- रिकॉर्ड संग्राहक संख्या: मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहक हितग्राहियों की संख्या अब 12 लाख से अधिक हो चुकी है, जो राज्य सरकार के सामूहिक प्रयासों की सफलता का प्रमाण है।
- समय पर भुगतान: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तेंदूपत्ता संग्राहकों का भुगतान 7 से 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
- पारदर्शिता: भुगतान का विवरण एसएमएस के माध्यम से सीधे संग्राहकों के मोबाइल पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
- प्रौद्योगिकी: लगभग 15 लाख 60 हजार संग्राहकों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज हो चुकी है, और सभी भुगतान सीधे बैंक खातों में किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने संग्रहण प्रक्रिया के पूर्ण कंप्यूटरीकरण को तेज करने पर बल दिया।
- समीक्षा: बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जिलों में पिछले सीजन की समीक्षा कर आगामी सीजन के लिए पूर्व-कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि समय पर लाभ सुनिश्चित हो।
वनोपज से आय बढ़ाने पर ज़ोर
- वैल्यू एडिशन: मुख्यमंत्री ने प्राथमिकता वन उपज का अधिकतम वैल्यू एडिशन करने को बताया। इसके लिए उन्होंने राज्य में वन धन केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर बल दिया, ताकि ग्रामीणों को अधिक आय के अवसर मिलें और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ सकें।
- आजीविका का साधन: लघु वनोपजों को वनांचल क्षेत्रों में आजीविका के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।
- स्टार्टअप्स और ब्रांड प्रमोशन: लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और वन धन केंद्रों को सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा हुई। साथ ही, छत्तीसगढ़ हर्बल और संजीवनी ब्रांड के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने तथा उनके जैविक प्रमाणीकरण (Organic Certification) की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया गया।
- 75 वनोपज की खरीदी: वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार अब 75 प्रकार की लघु वनोपजों की खरीदी करने जा रही है।
वन आवरण में वृद्धि और अन्य पहलें
- वन आवरण में वृद्धि: मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब वन आवरण 46% तक पहुँच चुका है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 2% अधिक है। उन्होंने इसमें कैम्पा योजना और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी पहलों के योगदान की सराहना की।
- लाख उत्पादन: वन मंत्री ने कहा कि लाख उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है, और लक्षित कार्य से प्रदेश प्रथम स्थान प्राप्त कर सकता है।
- औषधीय पौधों की खेती: औषधीय पौधों की खेती के विस्तार के लिए प्रचार-प्रसार गतिविधियों को बढ़ाने और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मैदानी अमले की सहायता लेने का सुझाव दिया गया।
- ईको-टूरिज्म: वन मंत्री श्री कश्यप ने बस्तर और सरगुजा संभागों में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और इसे आजीविका से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों और वन अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित कर निर्णयों को शीघ्र और प्रभावी ढंग से लागू करने की अपेक्षा जताई।


