शरीर का हर अंग महत्वपूर्ण है, लेकिन लिवर सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। लिवर, जिसे यकृत भी कहा जाता है, भोजन को पचाने, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, पित्त का उत्पादन करने और ग्लूकोज को संग्रहित करने में मदद करता है। लिवर शरीर का सबसे बड़ा अंग है और अपने आप ठीक हो जाता है। हालाँकि, जब लिवर में समस्याएँ आती हैं, तो यह कई महत्वपूर्ण संकेत प्रदर्शित करता है जिन्हें पहचानना ज़रूरी है।
जब लिवर की कोशिकाओं में वसा की मात्रा बढ़ जाती है, तो लिवर में सूजन आने लगती है। इस स्थिति को फैटी लिवर कहते हैं। फैटी लिवर शरीर की कैलोरी को वसा में बदल देता है, जिससे लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा हो जाती है। लिवर में सूजन कई कारणों से हो सकती है, जिनमें वायरल संक्रमण, अत्यधिक शराब का सेवन, फैटी लिवर, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव या ऑटोइम्यून रोग शामिल हैं। आइए लिवर में सूजन के लक्षणों और इसके ख़तरनाक होने के कारणों पर गौर करें।
लिवर में सूजन के लक्षण: सर गंगा राम अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल अरोड़ा बताते हैं कि जब लिवर में सूजन शुरू होती है, तो पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस होता है। इसके साथ ही, भूख न लगना और लगातार थकान बनी रहती है। कभी-कभी मतली या उल्टी भी हो सकती है। आँखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया), गहरे रंग का पेशाब और हल्का मल भी लिवर में सूजन के लक्षण हैं। कभी-कभी, शरीर और पैरों में सूजन और बार-बार बुखार आना भी लिवर में सूजन के लक्षण होते हैं।
लिवर में सूजन कितनी खतरनाक हो सकती है?
लिवर में सूजन को मामूली समझना खतरनाक हो सकता है। सूजन के लक्षणों को पहचानना और समय पर चिकित्सा उपचार लेना ज़रूरी है। लिवर में सूजन का तुरंत निदान और उपचार करवाने से कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। लेकिन अगर इसे नज़रअंदाज़ किया जाए, तो यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है, जैसे: सिरोसिस – यह स्थिति लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती है।
लिवर फेलियर – इलाज में देरी करने से लिवर फेलियर का खतरा बढ़ जाता है और लिवर पूरी तरह से काम करना बंद कर सकता है।
लिवर कैंसर – अगर लिवर में लंबे समय तक सूजन और सिरोसिस के लक्षण दिखाई दें और इसका इलाज न किया जाए, तो लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।
रोकथाम के लिए क्या करें:
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ शराब और तंबाकू का सेवन पूरी तरह से बंद कर दें। तैलीय और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से दूर रहें। फल, सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज का भरपूर सेवन करें। अपना वज़न नियंत्रित रखें। नियमित व्यायाम करें। हेपेटाइटिस ए और बी का टीका लगवाएँ। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें।


