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Monday, March 16, 2026
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 घर में सुख-शांति के लिए नवरात्रि में हवन कराना क्यों माना जाता है शुभ? जानें परंपरा

हिंदू धर्म में एक विशेष स्थान रखता है. इन नौ दिनों में, भक्त विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, जिनमें हवन या यज्ञ का विशेष महत्व होता है. यह सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह माना जाता है कि हवन घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का संचार करता है.


हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है. इस वर्ष भी यह पावन पर्व 22 सितंबर से शुरू हो चुका है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है. इन नौ दिनों के दौरान मां दुर्गा की पूजा, व्रत और भक्ति का विशेष महत्व है, लेकिन इस पूरे अनुष्ठान को हवन के बिना अधूरा माना जाता है. खासकर अष्टमी या नवमी तिथि पर किया जाने वाला हवन घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक लाने का सबसे शुभ और शक्तिशाली माध्यम माना गया है. आइए, जानते हैं कि नवरात्रि में हवन कराना क्यों इतना शुभ माना जाता है.

नवरात्रि में हवन का महत्व

देवी-देवताओं तक भोग पहुंचाना: हिंदू धर्म में अग्नि को देवताओं का मुख माना गया है. ऐसी मान्यता है कि हवन कुंड में समर्पित की गई आहुतियां (घी, हवन सामग्री आदि) सीधे देवी-देवताओं तक पहुंचती हैं. नवरात्रि में मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हवन अनिवार्य है.

मनोकामनाओं की पूर्ति: हवन में विशेष मंत्रों के साथ आहुति देने से एक विशिष्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है. माना जाता है कि मां दुर्गा इससे प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.

नकारात्मक ऊर्जा का नाश: हवन की पवित्र अग्नि और मंत्रों के उच्चारण से उत्पन्न शक्ति घर और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों और भय का नाश करती है, जिससे परिवार में शांति और प्रेम का वास होता है.

भूल-चूक के लिए क्षमा: नौ दिनों की पूजा में यदि कोई भूल या त्रुटि हो गई हो, तो हवन के माध्यम से देवी से क्षमा याचना की जाती है, जिससे पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है.

कब करें हवन?

नवरात्रि में हवन करने के लिए अष्टमी (दुर्गाष्टमी) और महानवमी का दिन सबसे शुभ माना जाता है. कई भक्त महाष्टमी के दिन हवन और कन्या पूजन करते हैं, तो कई नवमी के दिन इन अनुष्ठानों को पूरा करके व्रत का पारण करते हैं. शास्त्रों के अनुसार, कन्या पूजन और हवन के बाद ही नवरात्रि का व्रत पूर्ण माना जाता है.

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