कर्नाटक मंत्रिमंडल ने गुरुवार को हुई अपनी बैठक में विभिन्न कार्यकर्ताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम जनता के खिलाफ दर्ज 60 मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया। इनमें से 11 मामले सितंबर 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा डी.के. शिवकुमार की गिरफ्तारी के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित हैं। इन मामलों को रामनगर (अब बेंगलुरु दक्षिण) जिले के कनकपुरा, सथनूर और कोडिहल्ली पुलिस स्टेशनों में दर्ज किया गया था।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन विरोध प्रदर्शनों में कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के कार्यकर्ता शामिल थे, क्योंकि उस समय दोनों दल गठबंधन में थे।
प्रदर्शनकारियों पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने, निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने और कर्नाटक राज्य परिवहन निगम (केएसटीसी) की बसों पर पथराव करने जैसे आरोप लगाए गए थे। इन मामलों को कर्नाटक के गृह मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर और विधानसभा में सरकार के मुख्य व्हिप अशोक पट्टन द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर वापस लिया गया।


