‘मेरे प्यारे दोस्त डोनाल्ड ट्रंप को 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति बनने पर बधाई…।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के नाम जनवरी में यह संदेश दिया था। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेता एक-दूसरे को दोस्त बता रहे थे। बाद में ट्रंप ने फरवरी में कहा कि मोदी महान नेता हैं, हर कोई उनके काम के बारे में बात कर रहा है। मार्च में ट्रंप ने कहा कि नेगोशिएशन या वार्ता के मामले में मोदी के साथ उनका कोई कॉम्पिटिशन नहीं है। हालांकि, अगस्त में नौबत यहां तक आ गई कि खबरें आने लगी थीं कि पीएम मोदी ने ट्रंप से फोन पर बात करने तक से मना कर दिया। आखिर क्या है केमिस्ट्री घटने की वजह?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और ट्रंप के करीबी रहे जॉन बोल्टन ने कहा, ‘ट्रंप के मोदी के साथ व्यक्तिगत रूप से बहुत अच्छे संबंध थे। मुझे लगता है कि अब वह रिश्ता खत्म हो गया है, और यह सभी के लिए एक सबक है। उदाहरण के लिए, (ब्रिटेन के प्रधानमंत्री) किएर स्टॉमर के लिए, कि एक अच्छा व्यक्तिगत संबंध कभी-कभी मददगार हो सकता है, लेकिन यह आपको सबसे बुरे हालात से नहीं बचाएगा।’
तल्ख रिश्तों के ताजा सबूत
ट्रंप ने कुछ हफ्तों के अंतराल में पीएम मोदी को चार बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा, ‘भारत अपने सबसे बड़े ग्राहक अमेरिका को भारी मात्रा में सामान बेचता है, लेकिन हम उन्हें बहुत कम बेचते हैं। अब तक यह पूरी तरह से एकतरफा रिश्ता रहा है, और यह कई दशकों से चला आ रहा है।’ यहां तक कि उन्होंने भारत और रूस की अर्थव्यवस्था को ‘मरी हुई’ करार दे दिया था।


