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Friday, March 20, 2026
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शायरी कलेक्शन भाग -15 जावेद अख्तर का खूबसूरत अंदाज़

क्यूँ डरें ,जिंदगी में जाने क्या होगा?
कुछ ना होगा, तो तजुर्बा तो होगा

सँवरना ही है तो किसी की नजरों में संवरिये,
आईने में खुद का मिजाज नहीं पूछा करते

उनकी चिरागो में तेल ही कम था
क्यों गिला फिर हम हवा से करे
हमको उठना तो मुंह अंधेरे था
लेकिन एक ख्वाब हमको घेरे था

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया
उम्र भर दोहराएंगे ऐसी कहानी दे गया
उस से मैं कुछ पा सकू ऐसी कहाँ उम्मीद थी
ग़म भी शायद बराए मेहरबानी दे गया

हमारे दिल में अब तल्ख़ी नहीं है
मगर वो बात पहले सी नहीं है

कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी

डर हम को भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से
लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा

मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा
वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूँ हारा

याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा
कल रस्ते में उस ने हम को पहचाना तो होगा

कोई शिकवा न ग़म न कोई याद
बैठे बैठे बस आँख भर आई

हर खुशी में कोई कमी-सी है
हंसती आंखों में भी नमी-सी है

ऊँची इमारतों से मकाँ मेरा घिर गया
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए

मुझे मायूस भी करती नहीं है
यही आदत तिरी अच्छी नहीं है

इक मोहब्बत की ये तस्वीर है दो रंगों में
शौक़ सब मेरा है और सारी हया उस की है

मैं भूल जाऊँ तुम्हें अब यही मुनासिब है
मगर भुलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूँ

कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी
तुम से क्या कहते कि तुमने क्या किया

किसी को क्या बताये की कितने मजबूर हू ,
चाहा था सिर्फ एक तुमको और तुमसे ही दूर हू .
काश कोई हम पर भी इतना प्यार जताती,
पीछे से आकर वो हमारी आँखों को छुपाती,
हम पूछते की कौन हो आप …??
और वो मुस्करा कर खुदको हमारी जान बताती.

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