Total Users- 1,178,643

spot_img

Total Users- 1,178,643

Monday, March 23, 2026
spot_img

केरल के केरलम बनते ही : नाम बदलने की ऐसी है होड़, कहीं जीपीएस न तोड़ दे अपना दम और मरोड़

केंद्र सरकार ने राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।इस पर सबसे मजेदार प्रतिक्रिया शशि थरूर की रही, जिन्होंने पूछा कि अब वहां के निवासियों को क्या कहा जाएगा— ‘केरलम-आइट’ (Keralamite) या ‘केरलम-इयन’ (Keralamian)? उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि ‘केरलम-आइट’ किसी सूक्ष्म जीव (Microbe) जैसा लगता है। ममता दीदी नाराज़ हैं कि उनका ‘बांग्ला’ प्रस्ताव धूल फांक रहा है। केंद्र शायद इसलिए रुका है क्योंकि उन्हें डर है कि नाम बदलते ही लोग रसगुल्ले को ‘बांग्ला-गुल्ला’ न कहने लगें। “पहले मेरा, फिर तेरा” की इस जंग में बंगाल फिलहाल ‘वेटिंग लिस्ट’ वाले यात्री जैसा महसूस कर रहा है।। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में फतेहाबाद का नाम ‘सिंदूरपुरम’ करने का प्रस्ताव है। विपक्ष कह रहा है कि अब क्या वहां की सड़कों पर भी मांग भरी जाएगी? समर्थकों का मानना है कि नाम बदलते ही शहर की किस्मत चमक जाएगी। कम से कम सुहागिनों को तो अब एड्रेस बताने में बड़ी ‘सांस्कृतिक’ फीलिंग आएगी . विपक्ष इसे ‘नामकरण उत्सव’ बता रहा है, जबकि समर्थक इसे सांस्कृतिक जीत मान रहे हैं। बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवालने दिल्ली का नाम बदलकर ‘ इंद्रप्रस्थ’ करने का सुझाव देकर एक और नई बहस छेड़ दी है। वैसे एक शहर का नाम बदलने में 300 करोड़ रुपये लगते हैं। जनता पूछ रही है कि क्या इतने में सड़कों के गड्ढे नहीं भर सकते थे? जवाब मिला— “नहीं, अब गड्ढे ‘ऐतिहासिक स्मृतियों’ के प्रतीक माने जाएंगे।” अगर आप उस गड्ढे में गिरते हैं, तो उसे ‘एक्सीडेंट’ नहीं, ‘इतिहास में पतन’ कहा जाएगा। अब गूगल मैप्स का क्या होगा? कहीं ऐसा न हो कि आप जाना चाहें ‘गुड़गांव’ और पहुँच जाएं ‘गुरुग्राम’ के किसी ऐसे कोने में जहाँ नाम तो बदल गया, पर मोहल्ले की नाली अभी भी मुग़ल काल वाली ही बह रही हो। आपको क्या लगता है ?
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , पूरब टाइम्स

More Topics

नवरात्रि व्रत में भी खा सकते है समा चावल का हेल्दी और स्वादिष्ट उपमा

नवरात्रि व्रत में साबूदाना और कुट्टू से हटकर कुछ...

इसे भी पढ़े