डोनाल्ड ट्रंप के लिए, इरान पर यह हमला किसी ऑस्कर विनिंग फिल्म से कम नहीं है. वे ऐसे डींगें हांक रहे हैं जैसे उन्होंने खुद गदा लेकर राक्षस का वध किया हो. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए ‘पूर्व-नियोजित हमला’ एक ऐसा जादुई शब्द है जिसे बोलकर वे किसी की भी रसोई में घुसकर बम फोड़ सकते हैं. इधर संयुक्त राष्ट्र अब एक ऐसी संस्था बन गई है जो केवल यह गिनने व चेतावनी देने के काम आती है कि कितनी मिसाइलें किस नियम को तोड़कर गुजरीं. ईरान का आठ देशों पर मिसाइल दागना बिल्कुल वैसा ही है जैसे मोहल्ले का कोई बच्चा पिटने के बाद रास्ते में खड़ी हर साइकिल की हवा निकाल दे. ईरान के कमांडरों के लिए अब ‘गम्भीर मीटिंग’ शब्द किसी “मौत के फतवे” से कम नहीं है. पहले जब कोई कहता था “चाय पर मिलते हैं”, तो उसका मतलब रणनीति होता था , अब इसका मतलब ‘श्रद्धांजलि सभा’ की एडवांस बुकिंग होता है. पूरी दुनिया चीन और रूस की तरफ ऐसे देख रही थी जैसे वे कोई मसीहा हों, लेकिन वे तो ‘बकबक पहलवान’ निकले. केवल ‘कड़े शब्दों में निंदा’ करने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं . वैसे अमेरिका की रणनीति अब ‘ग्लोबल पुलिस’ से बदलकर ‘ग्लोबल गुंडा’ वाली हो गई है. अमेरिका का अपने से कमज़ोर व छोटे देश में घुसकर, सरे-आम वहां के नेतृत्व को पकड़ना व किसी देश के मुखिया को मार देना यह बताता है कि अब ‘वीजा’ की जरूरत केवल आम लोगों को है, अमेरीकी सेना व मिसाइलों को नहीं पर उन्हें समझाए कौन ? “सांड के आगे जो बीन बजाये वो सांड से कुचला जाये ” .
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , पूरब टाइम्स


