हमने कहानियों में पढ़ा था कि भस्मासुर को वरदान मिला था पर पाकिस्तान ने तो खुद के ‘भस्मासुर’ लैब में तैयार किए हैं। अब जब वे तालिबानी ‘भस्मासुर’ अपनी हथेली, पाकिस्तान के ही सिर पर रखने को आतुर हैं, तो पाकिस्तान को अचानक शांति और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की याद आ रही है। पाकिस्तान ने दशकों तक दुनिया को ‘आतंकवाद की होम डिलीवरी’ दी है। जब तक ये आतंकी भारत में घुसते थे, तब तक ये ‘स्वतंत्रता सेनानी’ थे, लेकिन जैसे ही इन्होंने डूरंड लाइन पार की, ये ‘भारतीय एजेंट’ हो गए। पाक पर ये कहानी फिट बैठती है , एक शख्स ने सालों तक लोमड़ियों को पाला ताकि वो पड़ोसी की मुर्गियां खा सकें। एक दिन लोमड़ियां भूखी थीं और उन्होंने खुद मालिक को ही काट लिया। अब मालिक चिल्ला रहा है कि ‘पड़ोसी ने मेरी लोमड़ियों को ट्यूशन पढ़ाया है!’ . पाकिस्तान की सेना इस समय उस फटे हुए ढोल की तरह है जिसे वो जितना ज़ोर से बजाते हैं , उतनी ही पोल खुलती है। भारत पर आरोप लगाना दरअसल एक ‘डिस्ट्रैक्शन’ है ताकि लोग ये न पूछें कि अरबों डॉलर का डिफेंस बजट गया कहां? सच्चाई ये है कि पाकिस्तान ने नफरत की जो फैक्ट्री लगाई थी, उसमें अब ‘ओवरप्रोडक्शन’ हो गया है और माल अब उन्हीं के बाज़ार में बिक रहा है। आपको इस सबसे मज़ा तो आया होगा , आपके क्या रिएक्शन हैं ?
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , पूरब टाइम्स


