भारत और अमेरिका आज से आमने-सामने व्यापार वार्ता शुरू कर रहे हैं। लक्ष्य 2030 तक 500 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है। मुख्य मुद्दों में अमेरिकी टैरिफ, भारत की रूसी तेल खरीद और कृषि-ऊर्जा प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। दोनों देश सकारात्मक माहौल में रियायतों और दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा तलाशेंगे।

भारत और अमेरिका के बीच लंबित व्यापार वार्ता मंगलवार से एक बार फिर आमने-सामने की बैठकों के साथ शुरू हो रही है। सोमवार रात अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्वकर्ता, यूएस असिस्टेंट ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव फॉर साउथ एंड सेंट्रल एशिया ब्रेंडन लिंच नई दिल्ली पहुंच गए हैं।
वह वाणिज्य मंत्रालय के मुख्य वार्ताकार और विशेष सचिव राजेश अग्रवाल के साथ बैठकों में हिस्सा लेंगे। यह इन-पर्सन मुलाकात अगस्त 25 को टली छठी दौर की वार्ता के बाद पहली होगी। अब तक चर्चाएं वर्चुअल माध्यम से चल रही थीं।
2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
भारत और अमेरिका का उद्देश्य मौजूदा 191 अरब डॉलर के व्यापार को 2030 तक बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इसके लिए टैरिफ बाधाओं को हटाने, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और नियमों के तालमेल पर जोर दिया जाएगा।
क्या है लंबित विवाद
वार्ता में अमेरिकी टैरिफ और भारत की रूस से तेल खरीद मुख्य विवादित मुद्दे हैं। दोनों पक्षों को उम्मीद है कि समाधान निकलकर आपसी व्यापार वातावरण को बेहतर बनाया जा सकेगा।
ऊर्जा और कृषि पर अमेरिकी जोर
अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल खरीद कम करे और अमेरिकी मक्का (मकई) का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में करे। यह वार्ता का अहम हिस्सा होगा, क्योंकि इससे व्यापार संतुलन और अमेरिकी नीति उद्देश्यों पर असर पड़ेगा।
नेताओं की व्यक्तिगत कूटनीति का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सकारात्मक रिश्तों ने वार्ता को उत्साहपूर्ण माहौल दिया है। हालिया सोशल मीडिया संवाद ने दोनों देशों की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।
प्रतीकात्मक रियायतों से खुल सकता रास्ता
भारत यदि प्रीमियम चीज या जीएम कॉर्न जैसे सीमित आयात की अनुमति देता है, तो धीरे-धीरे टैरिफ कटौती का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, अमेरिका की प्राथमिक चिंताओं पर ठोस प्रगति ही अंतिम समझौते की राह बनाएगी।


