CBI ने अंतर्राष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया: 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, ₹1000 करोड़ से अधिक की ठगी

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल किया है। इस संगठित गिरोह में चार विदेशी नागरिक और 58 फर्जी कंपनियाँ शामिल थीं। सीबीआई की जाँच में सामने आया है कि यह नेटवर्क ऑनलाइन ठगी के ज़रिये लोगों से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी कर रहा था।

🚨 फर्जी स्कीमों के जरिए ठगी

यह मामला भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर दर्ज किया गया था। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, गिरोह के तीन प्रमुख आरोपियों को अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था।

जाँच में खुलासा हुआ कि ये साइबर अपराधी लोगों को फंसाने के लिए कई तरह की फर्जी योजनाएं चला रहे थे:

  • फर्जी लोन ऑफर
  • नकली निवेश योजनाएँ (पोंजी स्कीम)
  • मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM)
  • फर्जी मोबाइल ऐप
  • झूठे नौकरी प्रस्ताव

💻 अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और फर्जी कंपनियाँ

ठगों ने अपनी पहचान छिपाने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया, जिनमें शामिल हैं:

  • Google विज्ञापन और बल्क एसएमएस कैंपेन।
  • सिम-बॉक्स मैसेजिंग सिस्टम और क्लाउड सर्वर।
  • फिनटेक प्लेटफॉर्म और सैकड़ों फर्जी बैंक खाते।

अधिकारियों ने पाया कि इस पूरे ऑपरेशन के केंद्र में 111 फर्जी कंपनियाँ थीं, जिन्हें नकली निदेशकों, जाली दस्तावेजों और फर्जी पतों के जरिए पंजीकृत किया गया था। सैकड़ों बैंक खातों के माध्यम से ₹1,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का लेन-देन किया गया। जाँच में पता चला कि इनमें से एक खाते में ही कम समय में ₹152 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की गई थी।

🌍 विदेश से संचालन और छापे

सीबीआई ने इस मामले में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में कुल 27 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान डिजिटल उपकरण, महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए।

फोरेंसिक जाँच में यह भी सामने आया कि विदेशी नागरिक विदेश से सीधे इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। दो भारतीय आरोपियों से जुड़ी एक UPI ID अगस्त 2025 तक विदेशी लोकेशन से सक्रिय रही, जिससे वास्तविक समय में विदेश से निगरानी की पुष्टि हुई।

नेटवर्क में शामिल विदेशी नागरिक (पहचान):

  1. जू यी
  2. हुआन लियू
  3. वेइजियान लियू
  4. गुआनहुआ वांग

आरोप है कि इन लोगों ने वर्ष 2020 से भारत में फर्जी कंपनियों के गठन की साजिश रची थी। यह कार्रवाई सीबीआई के ऑपरेशन चक्र-V के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य संगठित और अंतरराष्ट्रीय साइबर आर्थिक अपराधों पर रोक लगाना है।

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