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Tuesday, March 24, 2026
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फिलिस्तीन मुद्दे पर सोनिया ने सरकार को घेरा, मोदी-नेतन्याहू दोस्ती पर उठाए सवाल

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने फिलिस्तीन मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले लोगों के हितों को लेकर नहीं होते, बल्कि दोस्ती से प्रभावित होते हैं. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार की ‘गहरी चुप्पी’ मानवता एवं नैतिकता दोनों का परित्याग है.
मोदी-ट्रंप की दोस्ती पर साधा निशाना

सोनिया गांधी ने आर्टिकल में इजराइल और भारत के साथ-साथ मोदी और ट्रंप की दोस्ती पर भी निशाना साधा. उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार की व्यक्तिगत कूटनीति की यह शैली सही नहीं है और यह भारत की विदेश नीति का मार्गदर्शक बिल्कुल नहीं बन सकती. उन्होंने कहा कि इसका परिणाम केंद्र सरकार ने अभी हाल ही में देखा है, जब अमेरिका ने उनकी दोस्ती के प्रयास को बुरी तरह विफल कर दिया है.

UN के अधिकतर देशों ने दी मान्यता

सोनिया गांधी ने लिखा कि अब तो फ्रांस ने भी फिलिस्तीन राष्ट्र को ब्रिटेन, कनाडा, पुर्तगाल और ऑस्ट्रेलिया की तरह मान्यता दे दी है. उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से 150 से अधिक देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है.

कांग्रेस के समय भारत की विदेश नीति मजबूत

कांग्रेस नेता ने जोर देते हुए कहा कि भारत ने कई सालों तक फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) का समर्थन किया था, जिसके बाद 8 नवंबर, 1988 को भारत ने औपचारिक रूप से फलस्तीनी राष्ट्र को मान्यता दी थी. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भारत ने आजादी से पहले ही दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का मुद्दा उठाया था और अल्जीरियाई स्वतंत्रता संग्राम (1954-62) के दौरान भी भारत ने अल्जीरिया का समर्थन किया था. इतना ही नहीं, बांग्लादेश और पाकिस्तान के 1971 के युद्ध में भारत ने हस्तक्षेप करके बांग्लादेश को पूर्ण समर्थन दिया था और उसे अलग देश बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

इजराइल-फिलिस्तीन पर चुप्पी तोड़े भारत: सोनिया

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत को फलस्तीन के मुद्दे पर नेतृत्व दिखाने की जरूरत है, जो अब न्याय, पहचान, सम्मान और मानवाधिकारों की लड़ाई है. उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से इजराइल और फिलिस्तीन जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर सैद्धांतिक और संतुलित रुख अपनाता रहा है.

बता दें कि सोनिया गांधी ने इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर पिछले कुछ महीनों में तीसरी बार लेख लिखा है, जिनमें उन्होंने हर बार इस मुद्दे पर मोदी सरकार के रुख की तीखी आलोचना की है.

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