इंडिया ब्लॉक के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी की चारा घोटाले के दोषी लालू प्रसाद यादव से निजी मुलाकात ने सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। देश के 20 वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस मुलाकात को संवैधानिक नैतिकता पर गहरा आघात बताते हुए सवाल खड़े किए हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सोमवार को एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि रेड्डी जैसे व्यक्तित्व, जिनका न्यायिक अतीत बेहद अहम रहा है, का चारा घोटाले में दोषी ठहराए जा चुके लालू यादव से मिलना बेहद चिंताजनक है। बयान में कहा गया कि लालू प्रसाद यादव सरकारी धन के लगभग 940 करोड़ रुपये के गबन में दोषी ठहराए गए हैं और ऐसे व्यक्ति से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार की निजी मुलाकात पर गंभीर आपत्तियां उठती हैं।
अधिवक्ताओं की आपत्ति
अधिवक्ताओं ने कहा कि चुनावी कारणों का हवाला देकर इस मुलाकात को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि लालू न तो सांसद हैं और न ही उपराष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में शामिल हैं। बयान में कहा गया कि इस मुलाकात का कोई वैध राजनीतिक उद्देश्य नहीं दिखता और इसकी संदिग्ध प्रकृति रेड्डी की निष्ठा व निर्णय क्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
संवैधानिक नैतिकता पर चोट
संयुक्त बयान में कहा गया, “यह विशेष रूप से चिंताजनक है कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश होने के बावजूद श्री रेड्डी ने ऐसे व्यक्ति से निजी स्तर पर संपर्क साधा है, जिसके आपराधिक कृत्यों की पुष्टि अदालतों द्वारा की जा चुकी है।” अधिवक्ताओं ने यह भी जोड़ा कि कुछ राजनीतिक गुटों की चुप्पी भी इस पूरे मामले में उतनी ही खतरनाक है, जो संवैधानिक नैतिकता पर दोहरे मापदंड को उजागर करती है।
विपक्ष का हमला
इस विवाद पर भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी रेड्डी पर हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि “किस तरह के जज हैं आप, जो लालू जैसे दोषी व्यक्ति से निजी मुलाकात कर रहे हैं?”
जनता के लिए चेतावनी
अधिवक्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि रेड्डी जैसे दावेदार, जो देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होने की महत्वाकांक्षा रखते हैं, द्वारा की गई यह चूक गंभीर निर्णयहीनता को दर्शाती है। जनता को इस पर गहन मूल्यांकन करना चाहिए कि क्या ऐसे व्यक्ति पर संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।


