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Thursday, March 12, 2026
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असम में राष्ट्रीय राजमार्ग बना आपातकालीन हवाई पट्टी, सीमा पर भारत की परिचालन क्षमता मजबूत

डिब्रूगढ़-मोरान खंड पर 4.2 किमी लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का शुभारंभ

चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से 300 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित असम में भारत ने रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-37 के एक हिस्से को लड़ाकू विमानों के लिए संभावित हवाई पट्टी के रूप में विकसित किया है। डिब्रूगढ़-मोरान खंड पर 4.2 किलोमीटर लंबी विशेष रूप से सुदृढ़ की गई आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ELF) का उद्घाटन प्रधानमंत्री Narendra Modi ने किया।

इस अवसर पर भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान ने मोरान स्थित इस विशेष खंड पर सफल लैंडिंग कर इसकी परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया। इस स्ट्रिप को सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के विमानों की आपातकालीन लैंडिंग और टेकऑफ के अनुरूप डिजाइन किया गया है।

यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?

वास्तविक नियंत्रण रेखा के समीप चीन के कई हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों की मौजूदगी के बीच भारत अपनी वायु क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में हाशिमारा, तेजपुर, जोरहाट और चाबुआ जैसे ठिकाने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

युद्ध या आपात स्थिति में स्थायी हवाई अड्डे शत्रु के निशाने पर आ सकते हैं। ऐसे में राजमार्ग आधारित हवाई पट्टियाँ वैकल्पिक और लचीला परिचालन विकल्प प्रदान करती हैं। खड़े लड़ाकू विमान जमीनी हमलों के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें तेजी से स्थानांतरित करने की क्षमता रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है।

रणनीतिक और भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

पूर्वोत्तर भारत भू-आबद्ध क्षेत्र है, जो शेष देश से केवल सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के माध्यम से जुड़ा है, जिसकी चौड़ाई अपने सबसे संकरे बिंदु पर लगभग 20–25 किलोमीटर है। इसके विपरीत, तिब्बत क्षेत्र में चीन ने तीव्र गति से बुनियादी ढांचे का विकास किया है, जिससे उसकी सैन्य गतिशीलता बढ़ी है।

ऐसे में मोरान राजमार्ग हवाई पट्टी भारत को आकस्मिक परिस्थितियों में तेज प्रतिक्रिया देने, सामरिक संतुलन बनाए रखने और निवारक क्षमता को मजबूत करने में मदद करेगी। यदि डिब्रूगढ़ हवाई अड्डा या चाबुआ वायुसेना स्टेशन किसी कारणवश अनुपलब्ध हो जाए, तो यह सुविधा वैकल्पिक लैंडिंग विकल्प के रूप में कार्य करेगी।

विशेष डिजाइन और सुरक्षा प्रावधान

इस 4.2 किलोमीटर लंबे खंड पर कोई केंद्रीय डिवाइडर नहीं रखा गया है, जिससे विमानों की आवाजाही सुगम हो सके। दोनों ओर बाड़बंदी की गई है और सड़क किनारे की अस्थायी संरचनाएं हटाई गई हैं, ताकि परिचालन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

यह परियोजना पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। राजमार्ग आधारित हवाई पट्टियाँ न केवल सैन्य रणनीति को मजबूती देती हैं, बल्कि आपदा प्रबंधन और नागरिक उड्डयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

मोरान में विकसित यह आपातकालीन लैंडिंग सुविधा भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती देने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में संतुलित और सशक्त उपस्थिति का संकेत भी देती है।

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