अफगानिस्तान में भूकंप की घटनाएं लगातार जारी हैं। नेशनल सेंटर फ़ॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, रविवार को 24 घंटे के भीतर दो भूकंप आए, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
पहला भूकंप रविवार को देर रात 10:08 बजे (IST) आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.2 मापी गई। भूकंप का केंद्र 36.51°N अक्षांश और 70.97°E देशांतर पर स्थित था, जिसकी गहराई 180 किलोमीटर दर्ज की गई।
इससे पहले, रविवार की सुबह 12:05 बजे (IST) अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता का एक और भूकंप आया था। यह भूकंप केवल 10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिससे आफ्टरशॉक आने की संभावना बढ़ गई।
4 फरवरी को भी आया था भूकंप
NCS के मुताबिक, 4 फरवरी को भी अफगानिस्तान में 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह भूकंप 60 किलोमीटर की गहराई पर आया था और इसका केंद्र 36.64°N अक्षांश व 71.16°E देशांतर पर स्थित था।
उथले भूकंप अधिक खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार, उथले भूकंप गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं, क्योंकि वे पृथ्वी की सतह के करीब अधिक ऊर्जा छोड़ते हैं। इससे ज़मीन का कंपन अधिक होता है और इमारतों व लोगों को अधिक नुकसान पहुंच सकता है।
भूकंप की संवेदनशीलता और असर
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (UNOCHA) के अनुसार, अफगानिस्तान प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन के लिए अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। दशकों के संघर्ष और अविकसितता के कारण यहां के कमजोर समुदायों पर इन आपदाओं का गंभीर प्रभाव पड़ता है।
रेड क्रॉस की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला भूगर्भीय रूप से अत्यधिक सक्रिय क्षेत्र है, जहां नियमित रूप से भूकंप आते रहते हैं। यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित है, जिसमें कई फॉल्ट लाइन्स शामिल हैं, जिनमें से एक हेरात से होकर गुजरती है।
भूकंप के लगातार झटकों ने अफगानिस्तान के लोगों में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में भूकंपों की निगरानी और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि जान-माल की हानि को कम किया जा सके।


