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Sunday, February 8, 2026
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जानिए कुतुब मीनार का इतिहास, दुर्घटनाएं और इसका ऐतिहासिक महत्व

कुतुब मीनार का इतिहास:

कुतुब मीनार दिल्ली, भारत में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक मीनार है, जिसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1193 में बनवाना शुरू किया था। इसे पूरी तरह से आलमगीर शाह के शासनकाल में 1368 में पूरा किया गया। यह मीनार इस्लामी विजय और दिल्ली सुलतानत की शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। कुतुब मीनार को यूनेस्को द्वारा 1993 में विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।

कुतुब मीनार की संरचना:

कुतुब मीनार की ऊंचाई लगभग 73 मीटर (240 फीट) है, और यह भारत की सबसे ऊंची मीनार है। इसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर से हुआ है और इसमें पांच मंजिलें हैं। हर मंजिल के बीच में बालकनियां हैं, जो इस संरचना की विशेषता हैं। मीनार के शीर्ष पर एक मीनार की तरह एक गोलाकार बटन है, जिसे “वेदिका” कहा जाता है।

दुर्घटनाएं:

कुतुब मीनार के इतिहास में कुछ दुर्घटनाएं भी शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  1. आग से नुकसान: 1857 के विद्रोह के दौरान कुतुब मीनार को आग से कुछ नुकसान हुआ था। इसके बाद, ब्रिटिश शासन ने इसे ठीक करने के लिए कुछ प्रयास किए।
  2. विवाद और संरचनात्मक क्षति: 1981 में मीनार की ऊंचाई पर चढ़ते समय एक दुर्घटना हुई थी, जिसके बाद कुतुब मीनार पर चढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

कुतुब मीनार का महत्व:

  1. सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व: कुतुब मीनार इस्लामी वास्तुकला का प्रमुख उदाहरण है और इसे भारत में इस्लामी शासन के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
  2. पर्यटन का आकर्षण: कुतुब मीनार दिल्ली का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह भारतीय इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  3. स्मारक के रूप में: कुतुब मीनार न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारतीय ऐतिहासिक धरोहर का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कुल मिलाकर, कुतुब मीनार भारतीय स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और भारतीय इतिहास में इसकी अहम भूमिका रही है।

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