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Sunday, February 8, 2026
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जानिए भारत के पहले मानचित्र की अनोखी ऐतिहासिक कहानी

भारत का पहला मानचित्र, जिसे “मानचित्र कोस” कहा जाता है, का निर्माण भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक संरचना को दर्शाने के उद्देश्य से किया गया था। इसके विकास का इतिहास कई चरणों में बँटा हुआ है। यहाँ भारत के पहले मानचित्र और उससे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है:

1. प्राचीन काल का संदर्भ

भारत का प्रारंभिक मानचित्र धार्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया था।

  • महाभारत और रामायण काल: इन ग्रंथों में स्थानों और क्षेत्रों का उल्लेख मिलता है, जो उस समय के भौगोलिक ज्ञान को दर्शाते हैं।
  • पाणिनि और पतंजलि: इनके ग्रंथों में भी भारत के क्षेत्रीय विवरण मिलते हैं।

2. अभ्रक की सहायता से बने प्राचीन मानचित्र

  • प्राचीन काल में मानचित्र पत्थरों और ताम्रपत्रों पर बनाए जाते थे।
  • सम्राट अशोक के शिलालेख: ये शिलालेख भारत की भौगोलिक स्थिति को परिभाषित करते हैं।

3. मध्यकालीन काल

  • अल-बरूनी (11वीं शताब्दी): अल-बरूनी ने भारत का मानचित्र बनाने की कोशिश की, जिसमें हिंदुस्तान की भौगोलिक विशेषताएँ थीं।
  • मुगल काल: मुगलों ने भी भारत के भूभागों के बारे में मानचित्र तैयार किए।

4. आधुनिक काल का पहला वैज्ञानिक मानचित्र

  • 18वीं शताब्दी में ब्रिटिश सर्वेयरों ने भारत का व्यवस्थित रूप से सर्वेक्षण करना शुरू किया।
  • जेम्स रेनेल (James Rennell):
    • 1767 में जेम्स रेनेल ने भारत का पहला वैज्ञानिक और आधुनिक मानचित्र तैयार किया।
    • उन्हें “भारत का प्रथम भूगोलवेत्ता” कहा जाता है।
    • उनका मानचित्र भारत के क्षेत्रों, नदियों, और पहाड़ों का सटीक विवरण प्रस्तुत करता है।

5. ग्रेट ट्रिग्नोमेट्रिकल सर्वे ऑफ इंडिया (19वीं शताब्दी)

  • 19वीं शताब्दी में विलियम लैम्बटन और जॉर्ज एवरेस्ट ने भारत का त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण (Great Trigonometrical Survey) शुरू किया।
  • यह सर्वेक्षण आधुनिक भारत के मानचित्रों की नींव बना।

6. वर्तमान परिप्रेक्ष्य

आज भारत के मानचित्र को वैज्ञानिक उपकरणों और तकनीकों की मदद से अत्यधिक सटीक बनाया गया है।

  • भू-उपग्रह प्रणाली (GIS) का उपयोग।
  • भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India), जिसकी स्थापना 1767 में हुई थी, भारत के मानचित्र तैयार करने के लिए जिम्मेदार है।

भारत के पहले मानचित्र की महत्वता

  1. भारत की भौगोलिक समझ को बढ़ावा दिया।
  2. ब्रिटिश शासन के दौरान प्रशासनिक योजनाओं और रेलवे नेटवर्क के विकास में सहायक रहा।
  3. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का दस्तावेजीकरण किया गया।

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