क्विक कॉमर्स का बढ़ता प्रभुत्व: पारंपरिक किराना दुकानों पर असर

क्विक कॉमर्स मार्केट की बढ़ती हुई लोकप्रियता ने पारंपरिक किराना दुकानों पर बड़ा असर डाला है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे जोमैटो, जेप्टो, स्विगी, और बिग बास्केट अब 10 मिनट के अंदर डिलीवरी देने के जरिए उपभोक्ताओं को घर बैठे सामान उपलब्ध करवा रहे हैं, जो पहले पारंपरिक किराना दुकानों पर जाकर खरीदने की जरूरत थी। इस बदलाव के चलते पारंपरिक दुकानों की संख्या में गिरावट आई है।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में भारत में करीब 2,00,000 किराना स्टोर बंद हुए हैं। खासकर मेट्रो और टियर वन शहरों में इस ट्रेंड ने बड़ी भूमिका निभाई है। इसके अलावा, बड़ी कंपनियां जैसे आईटीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर ने सीधे ग्राहकों तक सामान पहुंचाने का तरीका अपनाया है, जिससे बीच के एजेंट्स की जरूरत कम हो रही है और इससे भी पारंपरिक किराना दुकानों को नुकसान हो रहा है।

क्विक कॉमर्स ने न केवल व्यापार मॉडल को बदल दिया है, बल्कि पारंपरिक खुदरा कारोबार पर भी असर डाला है। 2015-16 तक, खुदरा क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद 13 ट्रिलियन डॉलर तक था, जिसमें 34% हिस्सा किराना उद्योग का था। लेकिन 2023-24 तक इसमें 22% की गिरावट आई है, जो इस क्षेत्र में हो रहे बदलाव को दर्शाता है।

इस बदलाव का प्रमुख कारण यह है कि लोग अब घर बैठे ही ऑनलाइन ऑर्डर करने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे पारंपरिक दुकानों पर कम भीड़ हो रही है।

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