क्या सफाई ठेकदार महापौर की विशेष कृपा पात्र है ?
क्या प्लेसमेंट ठेकेदारों को एमआईसी का संरक्षण प्राप्त है ?
क्या दैनिक वेतन भोगी सप्लायर आयुक्त के सर-आंखों पर विराजमान है ?
पूरब टाइम्स, रिसाली भिलाई . भिलाई व रिसाली नगर निगम के सफाई कर्मियों को नियमानुसार दिये जाने वाली सुविधाओं की कमी व हाजरी रिकॉर्ड के ऊपर एक प्रकरण श्रमायुक्त कार्यालय के माध्यम से चल ही रहा है. अब यह भी विदित हुआ है कि इन दोनों निगमों में महिलाओं के अधिकारों के लिये बनाये गये कानूनों की भी अवहेलना की जा रही है. बताया यह भी जा रहा है कि प्लेसमेंट एजेंसीज़ व श्रमिक सप्लायर, अनेक नियमों का परिपालन इसलिये नहीं कर रहे है क्योंकि उन पर महापौर या एमआईसी मेंम्बर किसी भी तरह की जांच नहीं करते हैं या दूसरे शब्दों में कहें तो उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हुआ दिखता है . निगम के आयुक्तों की क्या मजबूरी है कि उनकी नाक के नीचे काम करने वाली लेबर ठेकेदार, अनेक नोटिसों के बावजूद , सहायक श्रमायुक्त कार्यालय दुर्ग को अपने कार्यों व अपने द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में लिखित जवाब नहीं दे रहे हैं . इस बीच इन निगमों की महिलाओं के अधिकार के लिये बनाई विशाखा समिति की ढिलाई पर कुछ महिलाओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिये हैं . अगले एक साल में इन निगमों में चुनाव है और ये मुद्दे भी प्रमुखता से उठाये जायेंगे, तब कांग्रेस की शहर सरकार द्वारा जवाब देना मुश्किल हो जायेगा. राजनीति से हटकर भी, सफाई ठेकेदारों व प्लेसमेंट एजेंसीज़ द्वारा लेबर नियमों व कानूनों का सही ढंग से परिपालन नहीं करना भी अपराध है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..
कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को नगर पालिक निगम रिसाली और भिलाई ने फाइलों के कब्रिस्तान में क्यों दफऩ कर दिया है ?
भिलाई और रिसाली निगम कार्यालयों में कामकाजी महिलाओं को सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था कितनी लचर है ? यह विषय, इस बात से स्पष्ट हो जाता है कि दोनों नगरीय निकायों ने कार्यरत महिलाओं की नियोजित स्थिति सार्वजनिक नहीं की है । जिसका परिणाम यह है कि निगम कार्यालय में नियोजित कर्मियों को अपनी वरिष्ठता को साबित करना संभव नहीं हो पा रहा है । गौर तलब रहे कि कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने के मामले में भी भिलाई और रिसाली निगम विफल है। जिसके कारण शोषण मामले में कोई पूछताछ और सुनवाई नहीं हो रही है, परिणाम स्वरूप पिछली विजेता कांग्रेस भी मतदाताओं से दूर होती जा रहीं है ।
दैनिक वेतन भोगी श्रमिक और अनियमित कर्मचारियों का शोषण तंत्र क्या कांग्रेस की शहर सरकार ने विकसित नहीं किया है ?
भिलाई और रिसाली निगम में कांग्रेस की शहर सरकार वर्षों से अविभाजित भिलाई निगम ने सफाई कर्मियों, दैनिक वेतन भोगियों और प्लेसमेंट कर्मचारियों का नियोजित ब्यौरे को सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी कभी भी पूरी नहीं की है , रिसाली निगम भी इन्हीं गड़बडिय़ों को दोहरा रहा है । जिसका कारण नियोजित श्रमिकों मजदूरों और कर्मचारियों को पता है लेकिन ऐसा लगता है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू व कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं को शायद यह मामला पता नहीं है । यह कहे जाने का आधार विगत विधानसभा और लोकसभा चुनाव परिणाम है। जिसमें देवेंद्र यादव और भूपेश बघेल को छोड़ सभी कांग्रेस के विधायक प्रत्याशियों को मतदाताओं ने घर का रास्ता दिखा दिया है । इसके बाद अब कांग्रेस महापौर और पार्षदों को बारी दिखाई देती है ।
सिर्फ ठेकेदारों के प्रति सहानभूति दिखाने वाली भिलाई और रिसाली निगम की शहर सरकार कब जिम्मेदारी पूरी करेगी ?
एशिया का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्र और इस संयंत्र से जुड़े बड़े और माध्यम उद्योग अपनी आर्थिक तरक्की करने के लिए चिमनी से रोजाना धुंआ उगल रहे है लेकिन इस धुएं में श्रमिकों , मजदूरों और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के श्रमिक अधिकारों को राजनीतिक तौर पर झोंके जाने की बदबू भी है। भिलाई और रिसाली निगम महापौर मूक दर्शन कर श्रमिक अधिकार संरक्षण मामले में सिर्फ ठेकेदारों और लेबर सप्लायरों को महत्व दे रहे हैं , जिसके कारण श्रमिकों और अनियमित कर्मचारियों के नियोजित अधिकारों का बे रोक-टोक हनन किया जा रहा है । जिसका विपरीत परिणाम आने वाले निगम चुनाव में कांग्रेस को स्वाभाविक तौर पर भोगना पड़ेगा ।
भिलाई और रिसाली निगम महापौर यह समझ गए है कि आगामी निगम चुनावों में उनको और उनके पार्षदों को मतदाताओं द्वारा कितनी जगह दी जाने वाली है । अत: महापौर पार्टीगत हित से अधिक महत्व व्यक्तिगत हित की दे रहें है, इसलिए श्रमिकों मजदूरों और कर्मचारियों को श्रम विधि से परिचित करवाने की पहल कर रहा हूं ।
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता


