कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन मूकदर्शक की भूमिका कब तक निभाते रहेंगे ?
भाजपा समर्थित छात्र संगठन शैक्षणिक गुणवत्ता को सुनिश्चित करवाने कब आगे आयेंगे ?
उच्च शिक्षा विभाग की खानापूर्ति वाली कार्यशैली पर विराम लगाने वाला कौन है ?
पूरब टाइम्स , दुर्ग , रायपुर . छत्तीसगढ़ के मध्य अंचल में सबसे प्रसिद्ध व पुराने विश्वविद्यालय , रविशंकर विश्वविद्यालय में हो रहे अपारदर्शिता वाले कार्यों को , पूरब टाइम्स अखबार ने प्रमुखता से जगह दी थी . सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारियों को ना देकर उनकी जगह दूसरी जानकारियां देना , अपने यहां आबंटित रकम के खर्चों को नियमानुसार नहीं करना , शैक्षणिक गुणवत्ता के नियमों का पालन इत्यादि अनेक मुद्दे हैं , जिन पर विश्वविद्यालय की जांच , सुधार व जवाब अपेक्षित है . अमूमन यही हालात , या कहें उससे बदतर हालात हेमचंद विश्व विद्यालय , दुर्ग के हैं . इस विश्वविद्यालय में पारदर्शिता की समस्या तो है ही नहीं वरन यूजीसी अनुदान का कुशलतापूर्वक उपयोग , निरीक्षण और लेखा परीक्षा , शिकायत निवारण तंत्र व सूचना का अधिकार अधिनियम से पारदर्शिता इत्यादि के मामले , संज्ञान कराने के बाद भी ठंडे बस्तेमें डाल दिये जाते हैं . ये मामले विभिन्न छात्र संगाठनों की जानकारी में आते भी हैं पर उनपर, कोई त्वरित व कारगर, कार्यवाही नहीं की जाती हैं . यह आश्चर्य की बात है कि अनेक सालों से कुछ राजनैतिक पार्टियों के सक्रिय छात्र विंग भी इन बातों पर ध्यान नहीं देते . क्या ये राजनीतिक संगठन केवल छात्रों में ,चुनाव के माध्यम से अपना वर्चस्व दिखाने के लिये हैं या फिर अपने राजनीतिक आकाओं के आदेश पर धरना प्रदर्शन व शक्ति प्रदर्शन के साधन बन गये हैं ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..
रविशंकर विश्वविद्यालय और इसके कार्य क्षेत्र को विभक्त कर बनाए गए हेमचंद विश्वविद्यालय की प्रशासकीय कार्यवाहियों को प्रश्नांकित करने वाले ज्वलंत मामले ?
1/ शैक्षणिक गुणवत्ता: उच्च मानकों को बनाए रखना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के मामले में छात्र नेता क्या कर रहें है ?
2/ वित्तीय अनुशासन: यूजीसी अनुदान का कुशलतापूर्वक उपयोग और इसके पारदर्शिता को सुनिश्चित करवाने के मामले में छात्र नेताओं की चुप्पी क्यों है ?
3/ जवाबदेही और पारदर्शिता: शासन, प्रबंधन और निर्णय लेने में जवाबदेही वाली कार्यवाही प्रक्रिया में छात्र नेता कब भागीदारी देंगे ?
4/ अनुसंधान और नवाचार: अनुसंधान को बढ़ावा देना, ज्ञान का आधार बनाना विश्वविद्यालय का कार्य है लेकिन इस मामले को छात्र नेता नजरअंदाज क्यों करते है ?
5/ सामाजिक जिम्मेदारी: सामाजिक रूप से प्रासंगिक कार्यक्रम, वंचित समुदायों का समर्थन, पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में विश्वविद्यालयों को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए लेकिन इस मामले को महत्व देने के स्थान पर छात्र नेता चापलूसी वाली कार्य व्यवहार का प्रदर्शन करते क्यों नजर आते हैं ।
विश्वविद्यालयों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के तंत्र को सशक्त बनाने वाले विषयों को नजरअंदाज करने वाले छात्र नेता को उपेक्षित किया जाना स्वाभाविक है !
वर्तमान समय में छात्र नेता छात्र हित के मुद्दों से ज्यादा व्यक्तिगत अपेक्षाओं को साधने वाली भूमिका में अधिक नजर आते है । उल्लेखनीय है कि अक्सर उन्हें चापलूसी और जीहुजूरी वाला कार्य व्यवहार करते देखा जाता है इसलिए उनका जनाधार और समर्थक छात्रों की संख्या नगण्य है गौरतलब रहे कि छात्र नेता जिन जिम्मेदारियों को पूरी नहीं कर रहे हैं वो है ।
1/ मूल्यांकन और रैंकिंग (NIRF): प्रदर्शन में सुधार के लिए प्रोत्साहन करने के लिए छात्र नेते कोई मांग करते नजर नहीं आते है ।
2/ निरीक्षण और लेखा परीक्षा: अनुपालन सुनिश्चित करने की कार्यवाहियों के विषयों पर छात्र संगठन वक्तव्य जारी नहीं करते है ।
3/ शिकायत निवारण तंत्र: छात्रों और हितधारकों के लिए आवश्यक होने के साथ – साथ उनका लोकतांत्रिक अधिकार है जिसके लिए छात्र नेता और संगठन अपनी जवाबदेही पूरी नहीं करते हैं ।
4/ सूचना का अधिकार अधिनियम: पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना के छात्र संगठन और नेताओं ने क्या किया यह प्रश्न अनुत्तरित है । छात्र नेता और संगठन अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहे है जिसके कारण प्रदेश का शैक्षणिक गुणवत्ता स्तर बढ़ नहीं रहा जो कि बेहद विडंबना पूर्ण स्थिति है ।
विश्वविद्यालयों की जवाबदेही सुनिश्चित करना उच्च शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और मान – मानक बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यूजीसी विभिन्न तंत्रों के माध्यम से इस जवाबदेही को लागू करता है लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि, विश्वविद्यालय स्वयं अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हों इसलिए रविशंकर और हेमचंद विश्वविद्यालय के कार्य व्यवहार की समीक्षा और सामाजिक अंकेक्षण हमारे द्वारा की जा रहीं है
अमोल मालुसरे,सामाजिक कार्यकर्ता


