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Friday, March 20, 2026
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रायपुर एम्स में गड़बड़ी- रायपुर एम्स में महिला सुरक्षा सुनिश्चित करवाने… अस्पताल प्रबंधन कितना कर्तव्यनिष्ठ है ?

पूरब टाइम्स, रायपुर . जब छत्तीसगढ़ के रायपुर में एम्स अस्पताल खोला गया तो पूरे प्रदेश में खुशी की लहर फैल गई . इसका कारण था लोगों में यह विश्वास कि बेहतरीन इलाज के साथ बिना किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार व गड़बड़ियों के यह अस्पताल चलेगा . समय के साथ अब इस एम्स में भी गड़बड़ियां उजागर होने लगी हैं . बताया यह जा रहा है कि एमस का प्रशासन महिला अधिकारों की रक्षा कराने में विफल हुआ है जिसके कारण एक मामले में उच्च स्तर की जांच भी की जा रही है . अमूमन यही हालात , यहां पर काम कर रही सिक्युरिटी एजेंसीज़ की भी है . जानकारी में आया है कि कुछ सामाजिक कार्यकर्ता , इस मामले को विधिक रूप से उठाकर , एम्स प्रबंधन को कठग़्हरे में लाने वाले हैं . पूरब टाइम्स ने पीड़ीतों के आग्रह पर पूर्व में कुछ इलाज में की गई गड़बड़ियों को भी उजागर किया था . इस बार कामगारों श्रम अधिकार व श्रम विभाग के कानूनों की धज्जियां उड़ाने की खबरें आ रही हैं . इस मामले को मीडिया के माध्यम से संज्ञान में लाने पर एम्स का उच्च प्रबंधन , प्रबंध समिति के सदस्य व श्रम विभाग उचित जांच व कार्यवाही करेगा , इसी आशय के साथ पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट …

अस्पताल में सफाई कार्य एवं अन्य रोगोपचार कार्य करने वाले श्रमिकों के अधिकार अधिनियमित कार्यवाही प्रक्रिया से सुनिश्चित करवाने की जिम्मेदारी एम्स रायपुर अस्पताल प्रबंधन की है । जिसके तहत ठेकेदार द्वारा नियोजित श्रमिकों का मास्टररोल-सह-मजदूरी रजिस्टर (नोटराइज) तथा नियोजित-व्यक्ति-सह-नियोजन-कार्ड रजिस्टर एवं प्रतिवर्ष 30 अप्रैल के पूर्व प्रस्तुत करने की विधिक बाध्यता होती है उल्लेखनीय है कि, अनुसूचित श्रम अधिनियमों के अधीन नियोजित श्रमिक विवरणों का संधारण प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट निरीक्षक या प्राधिकारी को दिए जाने वाले वार्षिक विवरणी कहां है यह प्रश्नगत मामला है जिसके संबंध में एम्स रायपुर की  विसंगतिपूर्ण विभागीय कार्यवाहियों को प्रश्नांकित करने के लिए एम्स रायपुर प्रबंध समिति के सांसद सदस्यों को संज्ञान लेना चाहिए

रायपुर एम्स अस्पताल से संबंधित कई मामले विगत महीनों में सुर्खियों में अपना स्थान बना चुके है जिसके बाद व्यथित और पीड़ित लोग अपनी आप बीती की शिकायत पर होने वाली अनपेक्षित व्यवहार को लेकर परेशान है जिसके कारण शासन की छवि धूमिल हो रहीं और एम्स रायपुर के प्रबंध समिति के सांसद सदस्यों को भी प्रश्नांकित करने वाली स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसका निराकरण करने के लिए पीड़ित लोग केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बता रहे है इसलिए अब देखने वाली बात है कि कब इस समस्या का समाधान होगा ।

रायपुर एम्स अस्पताल प्रबंधन को नियमितता के दायरे में रखने का प्राधिकार वर्तमान में दुर्ग और कोरबा सांसद के पास अस्पताल प्रबंधन समिति के सदस्य के तौर पर शासन द्वारा प्राधिकृत किया गया है जो शासन की तरफ से समिति सदस्य होने के नाते अस्पताल परिसर में होने वाली सभी अप्रिय घटनाओं का निराकरण करने के मामलों का संज्ञान लेने के लिए प्राधिकृत किए गए है उल्लेखनीय है कि विगत दिनों अस्पताल से जुड़ी अप्रिय घटनाओं की शिकायत कार्यवाही में अगर अस्पताल प्रबंधन के सांसद सदस्यों द्वारा संज्ञान लिए जाता है तो पीड़ितों के पक्ष को गंभीरता से लेकर जांच एजेंसी कार्यवाही करेंगी लेकिन क्या अस्पताल प्रबंधन ने शिकायत प्रकरण कार्यवाहियों में क्या सांसद सदस्यों से अभिमत लिया है ? यह प्रश्न वर्तमान में अनुत्तरित है । जिसका खुलासा सांसद सदस्यों की प्रतिक्रिया आने पर स्पष्ट होगा ।

एम्स रायपुर अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र है जहां महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाने के लिए गठित समितियां, जैसे आंतरिक शिकायत समित, श्रम कल्याण समिति, सफाई कर्मी उत्थान आयोग जैसी व्यवस्था का कार्यान्वयन प्रश्नांकित स्थिति में है इसलिए ऐसे मामलों पर सूचना नोटिस देकर अस्पताल प्रबंधन समिति के सांसद सदस्यों का ध्यानाकर्षण करवाकर आवश्य कार्यवाही करने का आग्रह करूंगा
अमोल मालूसरे,सामाजिक कार्यकर्ता

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