यूज एंड थ्रो से उत्पन्न खतरे को पहचान जाईए !
पुनः उपयोग करने वाली वस्तुओं का इस्तमाल करिए !
नगरीय निकाय प्रशासन की जवाबदेही तय करिए !
पूरब टाइम्स, दुर्ग भिलाई रायपुर । छ.ग. पर्यावरण विभाग ने एकल उपयोग प्लास्टिक वेस्ट के खतरे के बारे में एक जन जागृति अभियान चलाया था परंतु अब लगता है कि वह सब ठंडे बस्ते में चले गया है . पर्यावरण विभाग के द्वारा ऐस किया जाना समझ से परे है . यूं कहीं कि कभी कभी किसी निगम के आयुक्त को जब ऊपर से कलेक्टर इत्यादि के यहां से निर्देश आते हैं तो कुछ दिनों तक मुस्तैदी से एक प्लास्टिक उपयोग में लाने वाले दुकानदारों पर सख्ती से अर्थदंड लगाती है फिर कुछ दिनों बाद मामला टांय टांय फिश हो जाता है . किसी भी तरह की मीटिंग व सुख दुख के आयोजन में ज़्यादातर लोग एकल उप्योग प्लस्टिक का भरपूर उपयोग करते हैं और आयोजन समाप्त होने पर किसी भी जगह डम्प कर देते हैं. यह प्लास्टिक ना केवल जानवरों व इंसानों के स्वास्थ्य के लिये खतरा बन रहा है बल्कि धर्ती की उर्बरकता भी खत्म कर रहा है. इस विषय पर पूरब टाइम्स की यह रिपोर्ट ..
निगम आयुक्तों की मनमौजी कार्यप्रणाली के कारण लोकस्वास्थ खतरे में है ।
भारत ही नहीं पूरा विश्व एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं के कचरे से भयभीत है क्योंकि इस कचरे ने भूभाग एवं समुद्र के बड़े हिस्से को पाटकर पूरे विश्व को चुनौती दे दी है और अगर इस चुनौती को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो बड़ी विभस्त स्थिति खड़ी होने वाली है इसलिए भारत सरकार ने एकल उपयोग प्लास्टिक (Single-Use Plastic) के विनिष्टिकरण के लिए प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2021 को अधिसूचित किया है, जो 1 जुलाई 2022 से प्रभाव में आया है लेकिन इस विधि निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है । गौर तलब रहे कि, निगम आयुक्त मनमानी कर रहें है और पर्यावरण संरक्षण विभाग के अधिकारी निगम आयुक्तों का मनमानी को संरक्षण देने वाली कार्यवाही करने का अपराध खुल्लम खुल्ला कर रहे है जिस पर संज्ञान लिया जाना चाहिए ।
प्रतिबंधित वस्तुएं कौन सी है:
- -ईयरबड्स, गुब्बारों की छड़ें, कैंडी और आइसक्रीम की छड़ें
- -थर्मोकोल सजावट सामग्री
– प्लेट, कप, गिलास, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे
– मिठाई के डिब्बों की पैकेजिंग फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट पैकेट की रैपिंग
– 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले PVC बैनर और स्टिकर
- -थर्मोकोल सजावट सामग्री
विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व (EPR) नियम ने जिम्मेदारी तय कर दी है।
उत्पादक, आयातक और ब्रांड मालिकों को उनके उत्पादों के अपशिष्ट के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।उन्हें पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ तरीके से अपशिष्ट का प्रबंधन करना होगा।
निगरानी और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी किसकी है ?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) द्वारा निगरानी की जाएगी । नियमित रिपोर्टिंग और दिशानिर्देश जारी किए गए हैं
अधिनियम का उद्देश्य और प्रभाव
- पर्यावरण में प्लास्टिक अपघटन से उत्पन्न माइक्रोप्लास्टिक को रोकना
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाना
- समुद्री और स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना
- भारत के प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना
- गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार करने वाले… नगर निगम आयुक्तों पर को पर्यावरण विभाग क्यों दे रहा है संरक्षण ?
- छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं से उत्पन्न कचरे के
- विनिष्टिकरण मामले को अनियमितताओं के हवाले करके मूक दर्शक की भूमिका निभा रहा है
- जबकि पर्यावरण संरक्षण मंडल को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दे गई है जिसे पूरा नहीं किया
- जाना संज्ञान लिए जाने का विषय है ।
- एकल उपायों प्लास्टिक का खतरा शहरों, गांवों, नदी, नालों, तालाब, समुद्र सभी को है लेकिन
- इसका मुकाबला करने वाले शासकीय तंत्र शहर सरकार और पंचायत जागरूक नहीं है इस लिए
- विषय पर संज्ञान करवाकर जवादेही तय किया जाना विधि अपेक्षित है।
एकल उपायों प्लास्टिक का खतरा शहरों, गांवों, नदी, नालों, तालाब, समुद्र सभी को है लेकिन इसका मुकाबला करने वाले शासकीय तंत्र शहर सरकार और पंचायत जागरूक नहीं है इस लिए विषय पर संज्ञान करवाकर जवादेही तय किया जाना विधि अपेक्षित है।
अमोल मालुसरे,सामाजिक कार्यकर्ता
बर्तन बैंक बनाकर ही एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं के कचरे को रोक जा सकता है इसलिए मैं बर्तन बैंक बनाने के लिए जन जागरूकता लाकर सभी गांव और शहर में बर्तन बैंक बनाने की मुहिम चला रही हूं ।
श्रद्धा साहू सामाजिक कार्यकर्ता


