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Friday, March 13, 2026
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छत्तीसगढ़ी भाषा को महत्व कब देगी छत्तीसगढ़ शासन ?

पूरब टाइम्स, रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के साथ ही छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का गौरव प्रदान करना क्षेत्रीय अस्मिता और जनभावनाओं का सम्मान था। परंतु, 28 नवंबर 2001 को मिले इस वैधानिक दर्जे के दो दशक बाद भी प्रशासनिक गलियारों में छत्तीसगढ़ी अपनी वास्तविक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए संघर्ष कर रही है। आज भी सचिवालय की फाइलों से लेकर जमीनी प्रशासन की कार्यप्रणाली तक हिंदी और अंग्रेजी का एकाधिकार बना हुआ है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि किसी भाषा को ‘लोक’ से ‘तंत्र’ की भाषा बनाने के लिए केवल भावुकतापूर्ण नारे पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए कठोर ‘प्रशासनिक इच्छाशक्ति’ नियमों की स्पष्टता और आधुनिक ‘तकनीकी समाधानों’ का एक सुदृढ़ ढांचा अनिवार्य है। आज हम मूलभूत कमियों का विश्लेषण कर रहे हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ी के प्रशासनिक विस्तार को बाधित किया है और उन व्यावहारिक उपायों को रेखांकित करता है, जिनके माध्यम से राज्य की माटी की बोली को शासन-प्रशासन की मुख्यधारा में सर्वोपरि स्थान दिलाया जा सकता है। पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ी की कई बोलियां हैं (सरगुजिहा, हलबी, सादरी आदि)। जिनको महत्व दिलवाने का अपेक्षित समाधान यही है कि, शासन को एक ‘प्रशासनिक छत्तीसगढ़ी शब्दकोशÓ अनिवार्य रूप से लागू करना चाहिए, जिसमें विधिक और तकनीकी शब्दों का छत्तीसगढ़ी रूपांतरण हो। जब तक शब्दावली तय नहीं होगी, तब तक विधि मान्य ड्राफ्टिंग (प्रारूपण) संभव नहीं है।

छोटी छोटी पहल करने पर समाधान मिलने की रह पर चलना प्रारंभ किया जा सकता है । शुरुआत में सरकारी आदेशों, अधिसूचनाओं और सूचना पटल (हृशह्लद्बष्द्ग क्चशड्डह्म्स्रह्य) को हिंदी और छत्तीसगढ़ी दोनों में जारी किया जाना चाहिए। इससे धीरे-धीरे अधिकारियों और जनता को आधिकारिक छत्तीसगढ़ी पढऩे की आदत होगी जिससे धीरे धीरे छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रशासकीय अस्तित्व स्थापित होना प्रारंभ होगा ।

वर्तमान में कई अधिकारी बाहरी राज्यों से होते हैं या उन्हें छत्तीसगढ़ी लिखने-पढऩे का अभ्यास नहीं होता। जिसका समाधान किए जाने के लिए आवश्यक है कि, ष्टत्रक्कस्ष्ट और व्यापम की परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ी भाषा के ज्ञान को केवल ‘क्वालीफाइंग’ न रखकर उसके अंकों को चयन में अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए। प्रशासनिक अकादमी (जैसे निमोरा) में अधिकारियों के लिए अनिवार्य छत्तीसगढ़ी लेखन प्रशिक्षण सत्र आवश्यक होने चाहिए।

तकनीकी समावेशन (Digital Infrastructure) विकसित किया जाना नितांत आवश्यक प्रशासकीय पहल होगी ।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ी शासन का सारा काम कंप्यूटर पर होता है। इसलिए छत्तीसगढ़ी भाषा का तकनीकी समावेशन किए जाने का समाधान शासन स्तर से निकला जाना नितांत आवश्यक प्रशासकीय कर्तव्य है । छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए मानक कीबोर्ड ((Standard Keyboard)) और ‘फॉन्ट’ का विकास कर उसे सभी सरकारी सिस्टम में प्री-इंस्टॉल करना होगा। साथ ही, एआई (AI) आधारित अनुवाद सॉफ्टवेयर विकसित किए जाएं जो हिंदी फाइलों को तुरंत छत्तीसगढ़ी में बदल सकें।

छत्तीसगढ़ी को छोटी राजनीतिक इकाई स्तर पर प्रशासकीय अस्तित्व दिलवाना सबसे जरूरी समाधान के तौर पर अपनाया जाना नितांत आवश्यक है। कम से कम पंचायत स्तर के प्रस्ताव, आवेदन और मुनादी को पूरी तरह छत्तीसगढ़ी में अनिवार्य कर देना चाहिए। जब आधार मजबूत होगा, तो सचिवालय (Mantralaya) तक छत्तीसगढ़ी भाषा को पहुंचना स्वाभाविक हो जाएगा। गौर तलब रहे कि, एक कड़वा सच है की भाषा केवल सम्मान से नहीं, बल्कि “उपयोगिता” से जीवित रहती है। जब तक छत्तीसगढ़ी में काम करना “अनिवार्य” नहीं किया जाएगा और इसे “रोजगार” से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक यह केवल लोकगीतों और त्योहारों तक सीमित रह जाएगी।

सरकारी आदेशों, सूचनाओं और आवेदन पत्रों को हिंदी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी में भी जारी करना अनिवार्य होना चाहिये . इसके अलावा प्रशासनिक कार्यों, विधि (Law) और राजस्व के जटिल शब्दों का प्रशासनिक कार्यों, विधि (रुड्ड2) और राजस्व के जटिल शब्दों का सरल छत्तीसगढ़ी अनुवाद कर एक आधिकारिक शब्दकोश जारी किया जाना चाहिये । साथ ही छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग को केवल सलाहकार निकाय न रखकर, भाषाई नियमों के उल्लंघन पर जवाबदेही तय करने का अधिकार दिया जाना चाहिये ।
मधुर चितलांग्या , संपादक , पूरब टाइम्स

हम छत्तीसगढ़ी भाषा को सर्वोपरि प्रशासकीय महत्व क्यों नहीं दिखा पाए ? यह एक बहुत ही गहरा और प्रासंगिक प्रश्न है। राज्य सेवा परीक्षाओं (CGPSC/Vyapam) में छत्तीसगढ़ी भाषा के अंकों का वेटेज बढ़ाया जाए और मौजूदा कर्मचारियों को कार्यशालाओं के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाए। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम छत्तीसगढ़ी रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी भाषाई रूप से सक्षम और गौरवान्वित महसूस करे।
अमोल मालूसरे , सामाजिक कार्यकर्ता

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