भिलाई निगम सफाई ठेकेदार को विशेष संरक्षण देने के मामले में अव्वल क्यों है ?
सफाई ठेका मामले की अनियमितताओं की जानकारी स्थानीय विधायकों नहीं है क्या ?
सफाई कर्मियों के अधिकारों को सुनिश्चित करवाने वाली व्यवस्था कहां है ?
पूरब टाइम्स, भिलाई. इन दिनों भिलाई नगर निगम की सफाई की कुव्यवस्था और सफाई ठेकेदार के द्वारा मनमानी से आम जनता त्रस्त है . सफाई ठेकेदार इतने निरंकुश हो गये हैं कि निगम के ज़ोन ऑफिस व विपक्षी पार्षद के कहने पर भी सफाई का काम ठीक से नहीं करते है. सूत्रों की मानें तो सफाई ठेकेदार तथा निगम की सरकार व निगम प्रशासन की मिलीभगत से प्रति माह हर वार्ड में भारी आर्थिक अनियमितताएं हो रही हैं . केवल इतना ही नहीं , ठेके में रखे सफाई कर्मियों को छ.ग. में लागू अनेक कानून के अनुसार भुगतान व सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं. इस कारण से अनेक सफाई कर्मी अपनी ड्युटी ठीक से नहीं करते हैं . इन सबकी जांच निगम प्रशासन , स्वास्थ्य विभाग और श्रम विभाग के द्वारा किये जाने के लिये , कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिकायतें व विधिक नोटिसें भी दी हैं . हर तरह के कचरे का, कानून के अनुसार रिकॉर्ड कीपिंग व निष्पादन सही नहीं होने के कारण , पर्यावरण विभाग द्वारा भी निगम को नोटिस भेजा गया है . अब देखने वाली बात यह होगी कि संज्ञान लाने पर, जन प्रतिनिधि व उच्चाधिकारी , जांच व कार्यवाही कब तक करते हैं ? पूरब टाइम्स की रिपोर्ट ..
क्या महापौर महोदय बताएंगे कि सफाई कर्मियों के अधिकारों पर सुनियोजित अतिक्रमण करने वाला ठेकदार निरंकुश क्यों है ?
जनता अपना नेता इस विश्वास के साथ चुनती है कि नेता सभी मतदाताओं के आधारभूत अधिकारों को सुनिश्चित करवायेगा. नगर पालिक निगम मामले में यह जिम्मेदारी महापौर की है लेकिन भिलाई के महापौर के कार्य व्यवहार से प्रतीत होता है क, भिलाई महापौर ने निगम क्षेत्र के मतदाताओं के लोक स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की छूट सफाई ठेकेदार को दे दी है . इसके साथ – साथ सफाई कर्मियों के श्रमिक अधिकार पर अतिक्रमण करने की अनियमितता करने का अतिरिक्त अवसर भी सफाई ठेकेदारों को भिलाई महापौर को दे रखा है जो कि बेहद व्यथनीय है ।
सफाई कर्मियों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए जिम्मेदारी को नजरअंदाज करने के लिए क्या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को कुछ मिलता है क्या ?
भिलाई महापौर के गैर जिम्मेदाराना कार्याचरण को विशेष संरक्षण दुर्ग जिला प्रशासन के मुख चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनियमित संरक्षणपूर्ण कार्य व्यवहार के कारण मिल रहा है . उल्लेखनीय है कि, सीएमएचओ दुर्ग जिले के लोक स्वास्थ्य को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पदस्थ प्राधिकारी है जो नगरीय ठोस अपशिष्ठ के विनिष्टिकरण कार्यवाही का अनुश्रवण अधिकारी की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन करता है परंतु ऐसा नहीं हो रहा है इसलिए सीएमएचओ दुर्ग का गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार स्थानीय विधायकों द्वारा संज्ञान लिए जाने का विषय है ।
सफाई कर्मियों को नियोजित करने वाले ठेकदार द्वारा कार्य घंटों का विवरण लेखबद्ध किए जाने की सुनिश्चितता सहायक श्रम आयुक्त दुर्ग महोदय कब करेंगे ?
सफाई कर्मियों को नियोजित करने वाला ठेकेदार उनके श्रम अधिकारों पर खुल्लम – खुल्ला अतिक्रमण करने वाली अनुबंधित ठेका कार्यान्वयन कार्यवाही कर रहा है लेकिन श्रम विभाग द्वारा इस आपराधिक कार्य व्यवहार मामले के लिए प्राधिकृत लेबर इंस्पेक्टर का कार्य व्यवहार मानो ऐसा है कि जैसा उसे सफाई ठेकेदार की चाकरी करने और उसके अनियमित कार्याचरण को प्रश्नांकित नहीं करने के लिए राज्य शासन द्वारा नियुक्त किया गया है । उल्लेखनीय है कि, सहायक श्रम आयुक्त दुर्ग की इस मामले में चुप्पी बेहद शंकास्पद है । जिस पर स्थानीय विधायकों को संज्ञां लेना चाहिए ।
नगर निगम आयुक्त सफाई ठेके का लेखा जोखा को सर्व साधारण की जानकारी में लाने की पदेन जिम्मेदारी कब पूरी करेगा ?
भिलाई नगर निगम क्षेत्र में रोजाना सफाई कार्य में नियोजित श्रमिकों का विवरण और सफाई संबंधित कार्यों में होने वाले खर्चों को छिपाने वाला निगम आयुक्त निगम हित रक्षण करने के मामले में कितना कर्तव्यनिष्ठ है यह तो निगम आयुक्त की प्रतिक्रिया आने पर स्पष्ट होगा परंतु वर्तमान स्थिति में एक बात तो स्पष्ट है कि निगम क्षेत्र के सफाई मामले में कई आर्थिक तथ्यों को स्पष्ट करने की पदेन जिम्मेदारी का निर्वहन निगम आयुक्त नहीं कर रहा है । जिस पर संज्ञान लिया जाना आवश्यक है ।
भिलाई नगर निगम महापौर का कार्य व्यवहार सफाई ठेका मामले में शंकास्पद एवं चुनौती देने वाला है क्योंकि सफाई ठेका आबंटन कार्यवाही के साथ – साथ सफाई कर्मियों की श्रम विवरणी सार्वजनिक नहीं है । रोजाना सफाई कार्य में होने वाले खर्चों का हिसाब किताब भी पारदर्शिता के दायरे में नहीं है जो कि बड़े घोटाले की शंकाओं को आधार देता है ।
अमोल मालुसरे,सामाजिक कार्यकर्ता
महिला सफाई कर्मियों को नियोजित श्रमिकों के तौर पर शिकायत दर्ज करवाने और गरिमापूर्ण कामकाजी वातावरण दिलवाने की व्यवस्था निगम आयुक्त द्वारा नहीं किया जाना विधिक चुनौती देने का मामला है । जिस पर जिला कार्यक्रम अधिकारी का संज्ञान नहीं लेना पीड़ादायक है।
सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख


