सहायक श्रम आयुक्त दुर्ग के समक्ष सफाई ठेकेदारों के लेबर रिकॉर्ड देने से क्यों आनाकानी कर रहा है , स्वास्थ्य अधिकारी , भिलाई नगर निगम ?
क्या सफाई ठेकेदार से मिली भगत कर , श्रम नियमों के अनुसार मिलने वाली सुविधाओं से श्रमिकों को वंचित किया जा रहा है ?
क्या महापौर की जानकारी में शिकायतें व गड़बडिय़ां नहीं हैं ? फिर क्यों सफाई ठेकेदार पर कार्यवाही नहीं कर रहा है महापौर ?
पूरब टाइम्स, भिलाई . पिछले कई महीनों से श्रम आयुक्त , रायपुर के द्वारा अग्रेसित, भिलाई नगर निगम के सफाई कर्मियों के हित पर अघात पहुंचाने का प्रकरण , सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय, दुर्ग के न्यायालय में चल रहा है. सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण की पेशियों में बार-बार सूचना नोटिस के बावजूद, अपेक्षित कागज़ों के साथ, आयुक्त नगर निगम भिलाई के द्वारा अधिकृत सक्षम अधिकारी, उपस्थित नहीं हो रहा है. यह भी जानकारी मिली है कि नगर निगम, भिलाई, अपने वकील को भेजकर, अपनी उपस्थिति दिखाने की कोशिश कर रहा है जबकि इस तरह के श्रम सुविधा व भुगतान संबंधित मामले में, पूरे कागज़ों के साथ, जि़म्मेदार व्यक्ति की उपस्थिति आवश्यक होती है ताकि व्यक्तिगत रूप से मामले में अपना पक्ष रख सकें. सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा पूर्व में नोटिस देकर निगम आयुक्त व महापौर को इस मामले को संज्ञान करवाया गया था परंतु सभी ज़ोन के लेबरों के रिकॉड्र्स, भुगतान, उनको श्रम नियमानुसार दी जाने वाली सुविधाओं इत्यादि में अस्पष्टता व अपारदर्शिता के कारण, यह प्रकरण श्रम आयुक्त, रायपुर के यहां दर्ज कराया गया. इसके बावजूद स्वास्थ्य अधिकारी व सफाई ठेकेदार द्वारा दबंगाई से श्रम न्यायालय की अवहेलना करना, उनके राजनेताओं या उच्चाधिकारियों से मिलीभगत की तरफ इशारा करता है . पूरब टाइम्स की एक खबर …
भिलाई महापौर की विशेष कृपा से सफाई ठेके की गड़बडिय़ों को फलने-फूलने का अवसर दिए जाने का कुटिल उद्देश्य सफल होगा क्या?
भिलाई निगम क्षेत्र के विधायकों की प्रशासकीय आंखों में धूल झोंककर भिलाई निगम महापौर सफाई ठेके की गड़बडिय़ों को फलने फूलने का अवसर क्यों दे रहा है ? यह विषय महापौर की प्रतिक्रिया आने के बाद स्पष्ट होगा लेकिन इस मामले में विधायकों की राजनीतिक भूमिका भी धूमिल होने लगी है . चूंकि आने वाले कुछ समय में भिलाई और रिसाली निगम चुनाव है इसलिए सफाई ठेका मामला सुर्खियों में जगह बनाने लगा है और सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे द्वारा सफाई कर्मियों के अधिकार संरक्षण मामले में की गई शिकायतों पर हो रही कार्यवाहियों के आधार पर ज्वलंत चर्चा का विषय बनकर जांच के दायरे में भी आ गया है ।
निगम आयुक्त को प्रश्नांकित करने वाले सफाई ठेका मामले में महापौर की खामोश भूमिका गैर जिम्मेदाराना नहीं है क्या ?
भिलाई निगम के सफाई ठेका की अनियमितताओं का मामला निगम आयुक्त और स्वास्थ्य अधिकारी को कागजी कार्यवाहियों के आधार पर दोषी ठहराए जाने की दिशा में बढ़ रहा है. वहीं दूसरी ओर यह , निगम महापौर और एमआईसी स्वास्थ्य विभाग प्रभारी से मतदाताओं की राजनीतिक अपेक्षाओं और जिम्मेदारियों को पूर्ण नहीं किए जाने की समीक्षा के लिए तर्क संगत आधार भी स्थापित करेगी . भिलाई निगम सफाई ठेका मामला सुर्खियों में रहेगा लेकिन इस मामले में जब तक महत्वपूर्ण विषयों से पर्दा नहीं उठ जाता है ,तब तक कांग्रेसी महापौर को जवाब देने की बाध्यता रहेगी और कांग्रेस आगामी निगम चुनाव में कांग्रेस निगम सफाई ठेका मामलों की अनियमिताओं के घिरी हुई परिस्थिति में, स्वाभाविक रूप से नजर आयेगी।
आगामी निगम चुनावों में कांग्रेस को सफाई कर्मियों से किए जाने वाले छल कपट वाली राजनीति व्यवहार शैली पर जवाब देना पड़ेगा ?
वैसे तो कांग्रेस को दुर्ग जिले से खत्म कर प्रदेश कांग्रेस को अपने पकड़ में रखने की साजिश में सफल भूपेश बघेल ने दुर्ग जिले से कांग्रेस का अस्तित्व पहले ही खत्म कर दिया है . और अब आने वाले निगम चुनाव में बची-कुची कसर भिलाई महापौर पूरी करने की तैयारी कर चुके हैं क्योंकि आगामी निगम चुनावों में कांग्रेस नेताओं और पार्षद प्रत्याशियों के पास मतदाताओं के इस प्रश्न का जवाब नहीं होगा कि सफाई ठेके का प्रमाणित हिसाब किताब कहां है ? उल्लेखनीय है कि यह गंभीर मामला आगामी विधानसभा चुनावों तक प्रदेश स्तरीय राजनीत मुद्दा बन जायेगा।
सफाई कर्मियों के अधिकारों का हनन कर कौन सा राजनीतिक और आर्थिक उद्देश्य प्राप्त होगा, यह विषय भले ही दो मत वाली बहस का विषय होगा लेकिन सफाई ठेकेदारों की गड़बडिय़ों को छिपाने के लिए सफाई कर्मियों की हाजरी छिपाना अपराधिक हो सकता है ? जिसको स्थानीय संपरीक्षक कार्यालय, पर्यावरण संरक्षण मंडल, भिलाई कार्यालय और सहायक श्रम आयुक्त दुर्ग कार्यालय के रिकॉर्ड के साथ मिलान कर साबित किए जाने की कानूनी कार्यवाही कर रहा हूं ।
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता


