पेरू में एक मंदिर की खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को एक दर्जन से ज़्यादा लोगों के अवशेष मिले हैं। ये अवशेष 2300 साल पुराने हैं। इनमें से कई अवशेषों या कंकालों के गले में रस्सियाँ और हाथ पीठ के पीछे बंधे हुए हैं। माना जा रहा है कि इनमें से ज़्यादातर शव मानव बलि से जुड़े हो सकते हैं। हालाँकि, रस्सियों से बंधे कंकाल मिलने के बाद स्थानीय निवासियों ने किसी अनहोनी की आशंका जताई है। उनका कहना है कि वैज्ञानिकों को ऐसी चीज़ों से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।
मृतकों के चेहरे ज़मीन की ओर थे लाइव साइंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुरातत्वविदों ने खुलासा किया है कि इन कब्रों में कुछ दुर्लभ विशेषताएँ हैं। सैन मार्कोस के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में पुरातत्व के प्रोफ़ेसर हेनरी टैंटालियन ने कहा, “उन्हें जिस तरह से दफनाया गया था वह अजीब है। उनके चेहरे ज़मीन की ओर थे, जो एंडियन प्रागैतिहासिक काल में एक असामान्य दफ़नाने का तरीका था।” हेनरी टैंटालियन इस स्थल की खुदाई कर रहे पुरातत्वविदों की एक टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
रिसर्च में दावा मृत लोगों की खोपड़ियों में फ्रैक्चर पाए गए टैंटलियन ने बताया कि कई लोगों की खोपड़ियाँ फ्रैक्चर थीं। साथ ही, कुछ के गले में रस्सियाँ थीं और उनके हाथ पीठ के पीछे बंधे थे। उन्होंने कहा कि इन खोजों से पता चलता है कि इन लोगों की बलि दी गई थी। उन्होंने कहा कि “उनके पास कोई चढ़ावा या कब्र का सामान नहीं था, जो भी असामान्य है।” मंदिर 3000 साल पुराना है टैंटलियन के अनुसार, उनकी टीम ने 2024 में पेरू के उत्तर-पश्चिमी तट पर पुएमापे मंदिर परिसर के पास इन कब्रों की खोज की और 2025 में खुदाई शुरू की। उन्होंने कहा कि मंदिर लगभग 3,000 साल पुराना है, लेकिन ये कब्रें बाद के समय की हैं, लगभग 400 से 200 ईसा पूर्व की। उनका यह भी कहना है कि मानव बलि से पहले ही मंदिर को छोड़ दिया गया होगा।
मृत लोगों के डीएनए परीक्षण के विशेषज्ञ टैंटलियन ने कहा, “ये इस प्राचीन पूजा स्थल पर चढ़ाई गई बलि रही होंगी।” लेकिन पुरातत्वविदों को इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि बलि चढ़ाए गए लोग कौन थे। टैंटालियन ने कहा, “हो सकता है कि वे उसी इलाके में रहने वाले लोग रहे हों, हालाँकि हमारा यह भी अनुमान है कि वे किसी पड़ोसी घाटी से आए होंगे।” कंकालों का विश्लेषण जारी है, और टीम उन लोगों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण सहित अन्य अध्ययन करने की योजना बना रही है। टीम मंदिर परिसर में मिले मिट्टी के बर्तनों, जानवरों और पौधों का भी विश्लेषण कर रही है।


