केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले बीजेपी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के ऐलान के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। बीजेपी जहां UCC को अपने प्रमुख एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा रही है, वहीं कुछ सहयोगी दलों ने व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की सहमति की जरूरत पर जोर दिया है।
अमित शाह ने मुंबई में अपने संबोधन में UCC को सरकार के प्रमुख एजेंडे में शामिल बताते हुए कहा था कि देश में नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। UCC के तहत शादी, तलाक, विरासत और अन्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में समान नियम लागू करने की बात कही जाती है।
NDA सहयोगियों ने जताई अलग राय
शाह के बयान के बाद बीजेपी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने संकेत दिया कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना व्यापक चर्चा के आगे बढ़ना उचित नहीं होगा। JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि पार्टी के नेता गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। पार्टी ने सभी पक्षों की राय को जरूरी बताया है।
वहीं केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी UCC को लेकर जल्दबाजी से बचने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पहले UCC का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाना चाहिए और इसके बाद विभिन्न समुदायों तथा हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए। चिराग पासवान ने देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को भी महत्वपूर्ण बताया।
TDP ने नहीं किया अंतिम रुख स्पष्ट
NDA की एक अन्य सहयोगी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने फिलहाल UCC पर अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि उचित समय आने पर इस मुद्दे पर अपनी राय रखी जाएगी।
ऐसे में अमित शाह के 2029 तक UCC लागू करने के लक्ष्य के सामने केवल कानून तैयार करना ही चुनौती नहीं है, बल्कि NDA के भीतर सहयोगी दलों के बीच व्यापक सहमति बनाना भी महत्वपूर्ण होगा।
इन राज्यों में UCC को लेकर आगे बढ़े कदम
फिलहाल उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, असम और गुजरात में UCC को लेकर राज्य स्तर पर कदम उठाए जा चुके हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अन्य बीजेपी और NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है और सहयोगी दल इस पर किस तरह की सहमति बनाते हैं।


