लोकधुनों और लोकनृत्यों से सजा ‘लोकरंग पर्व’, भरथरी गाथा ने बांधा समां

छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को सहेजने और स्थानीय कलाकारों को मंच देने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का शुभारंभ रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में हुआ। यह आयोजन 8 सितंबर तक चलेगा।

आयोजन के पहले दिन छत्तीसगढ़ी लोकधुनों और पारंपरिक लोकगाथाओं की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को अपनी संस्कृति से जोड़ा। कार्यक्रम की शुरुआत भरथरी गाथा की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद पंडवानी, देवार गीत सहित विभिन्न लोकविधाओं की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।

लोकरंग पर्व में भरथरी गाथा, देवार गीत, करमा नृत्य, सरहुल, लोरिक-चंदा, ददरिया, पंडवानी और पंथी जैसी लोककलाओं की प्रस्तुतियां शामिल की गई हैं। पहले दिन दुर्गा साहू ने पंडवानी, पूनम तिवारी ने देवार गीत और अरुणिमा शर्मा ने भरथरी गाथा की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।

संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय कलाकारों को अपनी कला दिखाने का अवसर देने के साथ छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि लोककलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश के इतिहास, लोकविश्वास, सामाजिक जीवन और सामुदायिक परंपराओं की पहचान भी हैं।

तीन दिवसीय लोकरंग पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आगामी दिनों में भी प्रदेश की विभिन्न लोकविधाओं से जुड़े कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

शुभारंभ अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारी, कवि मीर अली मीर, अभिनेत्री श्वेता पड्डा, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा सहित बड़ी संख्या में कला एवं संस्कृति प्रेमी मौजूद रहे।

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