पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस में जिन्ना को शामिल करने को लेकर जम्मू यूनिवर्सिटी में छात्र संगठन ABVP और प्रशासन के बीच विवाद छिड़ गया है, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने इसे देश के बंटवारे के जिम्मेदार को पढ़ाना बताया। यूनिवर्सिटी ने इसे अकादमिक फैसला बताते हुए स्पष्ट किया है कि सिलेबस में गांधी, अंबेडकर और सावरकर जैसे अन्य विचारक भी शामिल हैं और यह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।
जम्मू यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विवाद की मुख्य वजह पॉलिटिकल साइंस के पोस्टग्रेजुएट सिलेबस में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना पर आधारित एक चैप्टर को शामिल करना है।
ABVP के कार्यकर्ताओं ने कैंपस में जमा होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की कि मॉडर्न इंडियन पॉलिटिकल थॉट मॉड्यूल से इस चैप्टर को तुरंत हटाया जाए। प्रदर्शनकारियों ने जिन्ना के पोस्टर फाड़ते हुए चेतावनी दी कि अगर सिलेबस में बदलाव नहीं हुआ, तो वे पूरे जम्मू-कश्मीर में अपना आंदोलन और तेज करेंगे।
देश के बंटवारे के जिम्मेदार लोगों को क्यों पढ़ाएं?
ABVP के प्रदेश सचिव सन्नक श्रीवत्स का कहना है कि सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद अली जिन्ना जैसे लोगों ने ‘टू-नेशन थ्योरी’ को बढ़ावा दिया था और देश के बंटवारे में मुख्य भूमिका निभाई थी।


