नई दिल्ली, 28 फरवरी 2026।
आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त करने वाले विशेष न्यायाधीश जितेंद्र प्रताप सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट में तैनात जज सिंह अपने सख्त, तथ्यों पर आधारित और प्रक्रिया-केंद्रित फैसलों के लिए जाने जाते हैं।
कौन हैं जज जितेंद्र प्रताप सिंह?
जितेंद्र प्रताप सिंह दिल्ली न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं और वर्तमान में राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पदस्थ हैं। वे भ्रष्टाचार और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई में विशेषज्ञता रखते हैं। अक्टूबर 2024 में उन्हें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने वाले सिंह को न्यायिक हलकों में एक संतुलित और स्वतंत्र दृष्टिकोण रखने वाले जज के रूप में देखा जाता है।
केजरीवाल मामले में क्या कहा?
अपने विस्तृत फैसले में जज सिंह ने जांच एजेंसी की चार्जशीट और प्रस्तुत साक्ष्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गवाहों के बयानों या अनुमानों के आधार पर किसी व्यक्ति को मुकदमे का सामना करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य के अभाव में आरोप तय करना न्यायसंगत नहीं होगा।
अतीत के चर्चित फैसले
भंवर जितेंद्र सिंह और एम.एफ. हुसैन पेंटिंग मामला
कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह से जुड़े एक मामले में जज सिंह ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें शिकायत खारिज कर दी गई थी। यह मामला प्रसिद्ध चित्रकार एम.एफ. हुसैन की एक कीमती पेंटिंग से जुड़ा था। अदालत ने प्रथम दृष्टया ‘आपराधिक विश्वासघात’ का मामला बनता पाया और सुनवाई दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए।
कपिल मिश्रा के बयान पर सख्ती
भाजपा नेता कपिल मिश्रा से जुड़े एक प्रकरण में भी जज सिंह ने चुनावी भाषणों को लेकर दायर याचिकाओं को खारिज किया था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की ओर इशारा करने वाले शब्दों का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है।
अमानतुल्लाह खान को राहत
वक्फ बोर्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ‘आप’ विधायक अमानतुल्लाह खान को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में राहत दी गई थी। अदालत ने कहा था कि जांच एजेंसी की ओर से पेश सामग्री आरोप तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
न्यायिक शैली: प्रक्रिया और साक्ष्य पर जोर
न्यायिक हलकों में जज जितेंद्र प्रताप सिंह को ऐसे न्यायाधीश के रूप में देखा जाता है, जो भारी-भरकम आरोपों के बजाय कानूनी प्रक्रिया और प्रमाणों की मजबूती को प्राथमिकता देते हैं। उनका मानना है कि किसी भी आरोपी—चाहे वह संवैधानिक पद पर रहा हो या आम नागरिक—के खिलाफ कार्रवाई ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।
केजरीवाल मामले में आया उनका फैसला एक बार फिर इस बात का संकेत देता है कि अदालतें केवल तथ्यों और कानून के आधार पर ही निर्णय देती हैं, न कि राजनीतिक दबाव या जनभावनाओं के आधार पर।


