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Monday, March 23, 2026
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क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षण मंडल भिलाई की…गड़बडिय़ों और अनियमितताओं वाले अनुत्तरित प्रश्न क्या है ?

पूरब टाइम्स, भिलाई रायपुर . ऐसा लगता है कि पर्यावरण संरक्षण के कई अधिकारियों ने इन दिनों लोगों की शिकायतें तो छोडिय़े अपने मूलभूत कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करने का ठान लिया है. भिलाई रायपुर में सादी आंखों से दिखने वाला, बीमारी पैदा करने वाला धुंआ छोडऩे वाली युनिट बोरई दुर्ग व सिलतरा उरला रायपुर, में बेखौफ प्रदूषण फैला रही हैं जैसे कि “सैंया भये कोतवाल अब डर काहे का”. भिलाई के क्षेत्रीय कार्यालय का हाल तो और बेहाल है .आवश्यकता पडऩे पर जन सुनवाई नहीं करवाने के आरोप भी अनेक लोगों द्वारा लगाये जा रहे हैं. एनजीटी के लिये बनाई जाने वाली, प्रदूषण नियंत्रण की वार्षिक रिपोर्ट की वास्तविकता पर भी संदेह जताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षण मंडल भिलाई को, छ.ग. पर्यावरण संरक्षण मंडल के मुख्यालय के कतिपय अधिकारियों द्वारा संरक्षण दिया गया है, जिसके कारण वे अपने आपको स्वयंभू समझने लगी हैं. सूत्रों के अनुसार वर्षों से मुख्यालय में डटे हुए उन अधिकारी की कार्यप्रणाली भी रैडार में आ चुकी है. अब देखने वाली बात यह है कि उच्चाधिकारी व माननीय मंत्री, उन लोगों के बारे में की गई शिकायतों को संज्ञान लेकर कब जांच करवाते हैं और जनता को कब न्याय देते हैं ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट …

भिलाई नगर पालिक निगम क्षेत्र के राधिका नगर स्थित पशुवध स्थल कई अनियमितताओं का अड्डा है. जिसका विरोध बरसों से स्थानीय लोग करते आये है लेकिन इस मामले में क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षण मंडल भिलाई ने जन सुनवाई की कोई व्यवस्था नहीं कराकर जनता की आवाज को दबाने का काम अपनी पदेन शक्तियों का दुरुपयोग करके किया है ,ऐसा आरोप लगाया जा रहा है । बावजूद इसके सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल कोई कार्यवाही नहीं कर रहे है जिसका कारण यही हैं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल भिलाई कार्यालय वस्तुस्थित को जानकारी मुख्य कार्यालय तक नहीं पहुंचा रहा है ।

विगत वर्षों में भिलाई और आस पास के क्षेत्र क्षेत्रों में बहुत से बड़े आयोजन किए गए जिसमें बड़ी संख्य में लोग आए थे . उल्लेखनीय है कि ये आयोजन क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षण मंडल भिलाई कार्यालय से कुछ ही दूरी पर आयोजित किए गए थे । जहां पर आयोजकों ने भोजन और अल्पाहार की व्यवस्था की थी । जिसे परोसने के लिए एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं का उपयोग बड़ी मात्रा में आयोजकों द्वारा किया गया और बड़ी मात्र में एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं का कचरा फैलाया था . उल्लेखनीय यह भी है कि, क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षण मंडल भिलाई कार्यालय से महज कुछ दूरी पर आयोजित यह एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं का कचरा फैलाने वाले आयोजनों कि अनियमितताओं को प्रश्नांकित नहीं किया गया है जो कि व्यथनिय है और पर्यावरण संरक्षण विधि अपेक्षा के विपरीत है ।

दुर्ग, बालोद और राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के चिकित्सा व्यवसायियों के द्वारा जनित किया जाने वाला चिकित्सा अपशिष्ट प्रत्येक चिकित्सा व्यवसायियों के संस्थानों से कितनी मात्रा रोजाना जनित होता है और उसका निपटान विधि द्वारा निर्धारित समय में होता है क्या ? यह प्रश्न अनुत्तरित है क्योंकि क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षण मंडल भिलाई ने इस प्रश्न के समाधान करने वाली जानकारी पब्लिक डोमेन पर प्रकाशित करने वाली व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की है . परिणाम स्वरूप चिकित्सा व्यवसायियों को अनियमितता करने की विशेष सुविधा मिली हुई है जो कि बेहद व्यथनिय विषय है इसलिए लोक स्वास्थ्य संरक्षण के दृष्टिकोण से इसका तत्काल संज्ञान लिया जाना अपेक्षित है ।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों का सबसे अहम विधि अपेक्षा है कि प्रदूषण करने वालों की जवाबदेही तय करवाई जाए जिसकी सुनिश्चितता के लिए क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षण मंडल वार्षिक प्रतिवेदन बनाकर अपनी पदेन जिम्मेदारी पूरी करने का सबूत देता है लेकिन क्षेत्रीय अधिकारी भिलाई की भूमिका इस मामले में पारदर्शिता के अभाव में बेहद संदेहास्पद है ।
अमोल मालुसरे सामाजिक कार्यकर्ता

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