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Saturday, February 28, 2026
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MGNREGA: मनरेगा को लेकर मोदी सरकार का बड़ा फैसला

केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), जिसे आमतौर पर मनरेगा कहा जाता है, को खत्म करने और ग्रामीण रोजगार के लिए एक नया कानून लाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस संबंध में एक विधेयक लोकसभा सदस्यों के बीच वितरित किया गया है।

🆕 नया कानून: विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)

नया कानून ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ विधेयक, 2025 कहलाएगा। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य एक ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना है जो विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप हो।

प्रमुख बदलाव और लक्ष्य:

विशेषतामनरेगा अधिनियम, 2005 (वर्तमान)नया विधेयक, 2025 (प्रस्तावित)
रोजगार की गारंटी100 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी।125 दिनों के मजदूरी रोजगार की सांविधिक गारंटी।
लक्ष्य‘काम करने के अधिकार’ की गारंटी देना।‘विकसित भारत 2047’ के अनुरूप समृद्ध और लचीले ग्रामीण भारत के लिए सशक्तिकरण, विकास और अभिसरण को बढ़ावा देना।
प्रकृतिसामाजिक सुरक्षा उपाय और श्रम कानून।एक ग्रामीण विकास ढाँचा स्थापित करना।

विधेयक का मकसद ‘एक समृद्ध और लचीले ग्रामीण भारत के लिए सशक्तिकरण, विकास, अभिसरण और संतृप्ति को बढ़ावा देना’ भी है।

🎯 मनरेगा की वर्तमान स्थिति

मनरेगा दुनिया के सबसे बड़े कार्य गारंटी कार्यक्रमों में से एक है, जिसे 2005 में शुरू किया गया था।

  • उद्देश्य: ग्रामीण परिवारों की रोजी-रोटी की सुरक्षा को बेहतर बनाना।
  • पात्रता: हर उस घर को नौकरी दी जाती है, जिसके वयस्क सदस्य अपनी मर्ज़ी से अकुशल शारीरिक कार्य करते हैं।
  • वर्तमान लाभार्थी: 2022-23 तक, MGNREGA के तहत 15.4 करोड़ सक्रिय श्रमिक हैं।
  • अधिकार: यह कानून किसी भी ग्रामीण वयस्क को काम मांगने के 15 दिनों के अंदर काम दिलाने की कानूनी गारंटी देता है, और ऐसा न होने पर ‘बेरोज़गारी भत्ता’ दिए जाने का प्रावधान है।
  • महिला भागीदारी: बेनिफिशियरी में कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होनी चाहिए।
  • विकेन्द्रीकरण: ग्राम सभाओं को किए जाने वाले कामों की सिफारिश करने का अधिकार है और कम से कम 50% काम उन्हें ही करने होंगे, जिससे पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को अहम भूमिका मिलती है।

यह विधेयक ग्रामीण रोजगार और आजीविका सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव लाएगा, जिसके लिए मनरेगा अधिनियम, 2005 को रद्द किया जाना है।

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