कांग्रेस की परंपरा अनुसार पुत्र को राजनीतिक स्थान नहीं मिला।
अनेक कांग्रेसी पार्षद परेशान होकर कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भाग गए!
रिसाली निगम विकास कार्य अपूरणीय क्षति उठाने मजबूर हुआ ।
पूरब टाइम्स , रिसाली . पिछले विधान सभा चुनाव में रिसाली क्षेत्र के विधानसभा दुर्ग ग्रामीण
से प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू चुनाव हार गये . विदित हो
कि उसके पहले रिसाली नगरनिगम के चुनाव में कांग्रेस ने धुंआधार जीत हासिल की थी. फिर
क्या कारण हुआ कि कांग्रेस की बढ़त वाले क्षेत्र में उसे हार का स्वाद चखना पड़ा ? सूत्रों की
मानें तो इसका प्रमुख कारण पूर्व मंत्री के पुत्रों का रिसाली निगम की राजनीति में दखल व
वर्तमान महापौर की कार्यशैली को जनता ने नकार दिया था . इस आने वाले वर्ष में रिसाली
नगर निगम के चुनाव आयेगा तब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस अपने ऊपर लगे धब्बे को
धो पाती है या नहीं ? महापौर की कार्यशैली में कोई चमात्कारिक सकारात्मक बदलाव आते हैं
या नहीं ? या फिर कांग्रेस अपने रसूखदारों के प्रभाव में दबकर , भाजपा को वाक-ओवर देगी?
पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट
कांग्रेस कार्यकर्ता जीत गए पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू की राजनीतिक महत्वकांक्षा साधने की कुटिल मंशा विफल हुई !
भारतीय राजनीति में छल कपट का कोई स्थान नहीं है इसका त्वरित उदाहरण रिसाली निगम
क्षेत्र की कांग्रेस की दुर्गति के तौर पर आज सभी के सामने है . उल्लेखनीय है कि जब रिसाली
निगम बना तो चर्चा थी कांग्रेसी युवराज ही महापौर होगा पर ऐसा नहीं हुआ . इसके बाद चर्चा
थी कि विधायक की निकट संबंधी महापौर होगी लेकिन यह चर्चा भी निरर्थक साबित हुई.
कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने रिसाली महापौर को पूरा समर्थन देकर महापौर पद पर बनाए रखा और चुनाव आते ही कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने मतदाताओं के साथ मिलकर जनता की अदालत से फैसला
करवाकर विधायक ताम्रध्वज साहू को हार का स्वाद चखा दिया है ।
रिसाली महापौर के काम में दखल देने वाले पूर्व गृहमंत्री के चहेतों के साथ – साथ कांग्रेस भी रिसाली निगम राजनीति से बाहर हो गई !
रिसाली क्षेत्र में बाहर से आकर पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने विधानसभा चुनाव जीत कर यह
गलतफहमी बना ली थी कि वह मनमर्जी करने के लिए स्वतंत्र है लेकिन रिसाली महापौर ने
अपनी राजनीतिक पारी की शुरवात से पूर्व गृहमंत्री की गलतफमी की त्रुटि सुधार कर अपना
वर्चस्व बना लिया. सबसे पहले महापौर ने एमआईसी सदस्यों का फेरबदल अपने मर्जी से कर
दिया उसके बाद जो पार्षद असहयोग कर रहे थे. उन्हें कांग्रेस छोड़ने को मजबूर कर दिया. पूर्व
गृहमंत्री को भी रिसाली महापौर ने विधानसभा चुनाव के दौरान रिसाली निगम क्षेत्र से हार का
स्वाद चखा दिया लेकिन अब आगामी निगम चुनाव में क्या होगा? यह आने वाला समय
बतायेगा ।
महापौर जीत गई और पूर्व गृहमंत्री हार गया तथा रिसाली निगम अनियमितताओं के अथाह सागर में डूब गया है।
रिसाली महापौर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आपसी तालमेल सफल साबित हुआ.
परिणाम स्वरूप रिसाली निगम क्षेत्र से पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को उखाड़ फेंकने की चाहत
रखने वाले लोग सफल हो गए है लेकिन रिसाली कांग्रेस की वर्तमान बदतर स्थिति पुनः कांग्रेस
की शहर सरकार बनाने का जनादेश ला पायेगी क्या ? यह प्रश्न अनुत्तरित है क्योंकि कांग्रेस का
कार्यकर्ता अभी कांग्रेस से कोसों दूर है. महापौर का अपना कार्यकर्ता वाला जनाधार नहीं है .
इसके अलावा कुछ चापलूसों को छोड़ पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के निवास की परिक्रमा करने
वाले लोग भी कम हो गए है इसलिए रिसाली भाजपा को फायदा होना स्वाभाविक है लेकिन क्या
रिसाली भाजपा इस अवसर का लाभ ले पायेगी ?
राजनीतिक वारिसों को महत्व देने वाली कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली रिसाली निगम में विफल हो
गई है जिसका श्रेय रिसाली निगम महापौर को जाता है क्योंकि रिसाली महापौर को उसकी कुर्सी
से कोई नहीं हटा पाया और जो पार्षद महापौर बनाने की चाहत रखते थे, वे आज कांग्रेस
छोड़कर भाजपा में है तथा पूर्व गृहमंत्री महोदय विधानसभा चुनाव हार गये हैं ।
अमोल मालुसरे
सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीतिक विश्लेषक


