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Sunday, March 1, 2026
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इतिहास में पहली बार ‘डिजिटल’ होगी भारत की जनगणना 2027: जाति, प्रवासन पर विस्तृत डेटा जुटाने की तैयारी

भारत की आगामी जनगणना 2027 देश के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है, क्योंकि यह पहली बार पूरी तरह से डिजिटल आयोजित की जाएगी। केंद्र सरकार ने इस दो-चरणीय प्रक्रिया के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य डेटा सुरक्षा, गति और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

📱 डिजिटल जनगणना की मुख्य विशेषताएं

यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप और एक वेब पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी।

  • डिजिटल प्रक्रिया: नागरिक स्वयं भी अपनी जानकारी भर सकेंगे (Self-Enumeration)।
  • मॉनिटरिंग: पूरा काम रियल-टाइम में ‘जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली’ (CMMS) द्वारा मॉनिटर किया जाएगा।
  • पारदर्शिता: पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए हर बिल्डिंग को जियो-टैग किया जाएगा।
  • भाषा: ऐप में हिंदी, अंग्रेजी सहित 16 से अधिक भाषाओं का विकल्प उपलब्ध होगा।

📜 1931 के बाद पहली बार जाति का विस्तृत डेटा

इस जनगणना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका विस्तृत डेटा संकलन होगा:

  • जातिगत डेटा: 1931 के बाद पहली बार अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के अलावा सभी समुदायों की जाति से जुड़े विस्तृत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे।
  • प्रवासन (Migration): प्रवास से जुड़े विस्तृत सवाल जैसे जन्मस्थान, पिछला निवास और स्थान बदलने की वजह भी पूछी जाएगी। यह डेटा सरकारी योजनाओं और नीति-नियोजन में महत्वपूर्ण होगा।

⚡ गति और उपयोगिता में क्रांति

डिजिटल होने से आंकड़ों का संकलन और रिपोर्टिंग अत्यधिक तेज हो जाएगी:

  • रियल-टाइम अपलोड: डेटा के रियल-टाइम अपलोड होने से अनुमान है कि प्रारंभिक आंकड़े 10 दिनों में और अंतिम रिपोर्ट 6-9 महीनों में मिल जाएगी।
  • नीति निर्धारण: यह गति 2029 के लिए नई लोकसभा सीटों के निर्धारण, सरकारी योजनाओं के फंड वितरण और बेहतर नीति-नियोजन में सहायक होगी।
  • सटीकता: सिस्टम में ऑटो-चेक और जियो-टैगिंग से गलतियों की संभावना काफी कम होगी।

💼 चुनौतियाँ और रोज़गार के अवसर

सरकार ने खर्च कम करने के लिए गणना कर्मचारियों को अपने स्मार्टफोन का उपयोग करने की अनुमति दी है, जिससे लगभग 2.4 करोड़ व्यक्ति-दिवस का अस्थायी रोजगार भी मिलेगा।

चुनौतियाँ:

  • भारत जैसे बड़े और डिजिटल रूप से असमान देश के लिए चुनौतियाँ हैं।
  • केवल 65% आबादी ऑनलाइन है और दूर-दराज के कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों में डेटा जुटाना एक चुनौती रहेगा।
  • सरकार ने बैकअप के तौर पर पेपर फॉर्म रखने की भी व्यवस्था की है ताकि कोई भी नागरिक वंचित न रह जाए।

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