सरगुजा, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन कार्डों के ई-केवाईसी (E-KYC) मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिले में करीब 1 लाख 59 हजार राशन कार्ड धारक सदस्यों का ई-केवाईसी नहीं हो पाया है, जिसके बाद खाद्य विभाग सकते में है।
इस बड़े अंतर ने यह आशंका पैदा कर दी है कि या तो इन अपात्र लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से राशन का उठाव किया जा रहा था, या फिर इतनी बड़ी संख्या में लोग जिले से बाहर शिफ्ट हो गए हैं।
📊 बोगस नामों का खुलासा करने की कवायद
दरअसल, पीडीएस योजना में लंबे समय से बोगस राशनकार्ड धारकों और मृतकों के नाम पर राशन उठाने के मामले सामने आ रहे थे। इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सभी राशन कार्ड धारकों का ई-केवाईसी अनिवार्य किया है।
- कुल सदस्य: सरगुजा जिले में करीब 9 लाख 10 हजार सदस्य हैं, जिनके नाम से हर माह राशन का आवंटन होता है।
- ई-केवाईसी हुआ: अब तक केवल 7 लाख 50 हजार के करीब लोगों ने ही ई-केवाईसी करवाया है।
- गायब सदस्य: इसका सीधा अर्थ है कि करीब 1 लाख 59 हजार सदस्यों का ई-केवाईसी नहीं हो सका है।
🚫 राशन आवंटन रोका गया
खाद्य विभाग अब लगातार इन ‘गायब’ राशन कार्ड धारकों को ढूंढने की कवायद कर रहा है, ताकि पात्र लोगों को उनका हक मिल सके और अपात्रों का राशन बंद किया जा सके।
विभाग ने इन सभी ई-केवाईसी नहीं हुए राशन कार्ड धारकों का राशन आवंटन रोक दिया है। विभाग का कहना है कि ई-केवाईसी होने पर ही इन्हें दोबारा राशन आवंटित किया जाएगा।
🤔 आशंकाएं: बोगस नाम या बाहर पलायन?
इस बड़े अंतर को लेकर दो मुख्य आशंकाएं जताई जा रही हैं:
- बोगस उठाव: आशंका है कि इनमें से ज्यादातर लोगों के नाम पर बोगस तरीके से राशन का उठाव किया जा रहा था।
- पलायन: यह भी संभव है कि कुछ लोग रोजगार या अन्य कारणों से जिले से बाहर कमाने-खाने चले गए हों।
अब देखना यह है कि विभाग के इस कदम के बाद कितने और लोग सामने आकर ई-केवाईसी कराते हैं और अंततः कितनी बड़ी संख्या में बोगस नामों का खुलासा हो पाता है।


