एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए एकजुट होगे लोग!
संभाग स्तरीय बर्तन बैंक परिकल्पना सहकारिता से पूरा करने की उल्लेखनीय पहल हो गई है।
प्रदूषण से निपटने के सामूहिक प्रयास को वास्तविकता के धरातल दिवायेगी सहकारिता।
पूरब टाइम्स, भिलाई दुर्ग . पिछले कुछ अर्से से पर्यावरण संरक्षण के लिये बर्तन बैंक की अवधारणा कार्य कर रही थी जिससे किसी भी तरह के शादी ब्याह, सार्वजनिक व राजनैतिक आयोजनों में एकल उपयोग के प्लास्टिक का इस्तेमाल रोका जा सके. दुर्ग जिले में सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहू ने बर्तन बैंक को स्थापित करने की कार्ययोजना बनाई व उसकी शुरुआत की. अब उसी कार्य को बड़ा रूप देते हुए सहकारिता के माध्यम से, उन्होंने पहले दुर्ग जिले फिर प्रदेश स्तर पर बर्तन बैंक क्रांति लाने की तैयारी शुरू कर दी है . अब वे सहकारिता के माध्यम से प्रदेश भर के महिला स्व सहायता समूहों को जोड़, बर्तन बैंकों के द्वारा प्लास्टिक कचरे को कम करवाने का कार्य करेंगी. उनके इस मुहिम को अनेक समाज सेवकों, राजनेताओं व अधिकारियों ने सराहा है व सहायता करने का आश्वासन दिया है .
पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..
श्रद्धा साहू की बर्तन बैंक परिकल्पना अब सहकारिता के मूल मंत्र के साथ लायेगी नवाचार
बर्तन बैंक वाली दीदी के परिचय से पहचानी जाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहू ने प्रदेश स्तरीय वैचारिक संगठन तैयार कर राज्य स्तर पर उल्लेखनीय जन जागरूकता लाई है और एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं के कचरे के विरुद्ध जन आंदोलन खड़ा किया है जिसके कारण प्लास्टिक कचरा उत्पन्न नहीं करने के लिए लोग प्रेरित हो रहें है। उल्लेखनीय है कि दुर्ग से श्रद्धा साहू द्वारा की गई नवाचार पहल अब सहकारी समिति के प्रावधानित प्रक्रिया से पंजीकृत होकर पर्यावरण संरक्षण हेतु अपना योगदान देने के लिए पहले से कहीं ज्यादा सशक्त हो गया है. इसके साथ यह वैचारिक मुहिम महिला स्व सहायता समूहों को शहरी क्षेत्रों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगी तथा समाज सेवा के क्षेत्र से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं भी नवाचार से जुड़कर प्लास्टिक कचरे के विरुद्ध अपना योगदान दे सकेंगे।
एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं का कचरा जनित करने वाले बड़े आयोजन अब प्लास्टिक मुक्त होंगे।
वर्तमान में एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं से उत्पन्न होने वाले कचरे से पूरा विश्व डरा हुआ है इसलिए अंतर राष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों की सरकारें एकजुट होकर प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न वैश्विक खतरे से निपटने के लिए सामूहिक कार्य योजना बनाकर कार्य कर रहें है भारत भी इस मुहिम में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने प्लास्टिक कचरे पर पूर्ण नियंत्रण करने हेतु कड़े कानून बनाए है और नगरीय निकायों को जिम्मेदारी सौंपी है इसी कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा साहू बर्तन बैंक बनाकर जन जागरूकता लाकर उल्लेखनीय सहकारी शक्ति का सृजन करने का नवाचार कर रहीं है ।
सहकारिता आंदोलन को व्यवहारिकता कार्य योजना के साथ कार्यान्वित करवाने हेतु यामिनी मैथिल का है उल्लेखनीय योगदान
किसी भी सार्वजनिक महत्व के कार्य को वृहद स्तर पर पूरा करने का कार्य सहकारिता आंदोलन से पूरा किया जाना संभव होता है इसलिए शासन ने सहकारिता को नियमबद्ध कर पृथक विभाग बनाया जो सहकारिता से किए जाने वाले कार्यों को नियमबद्ध करने और उसकी पारदर्शिता व प्रामाणिकता की सुनिश्चितता करता है । बर्तन बैंक परिकल्पना एक ऐसा ही आवश्यक सामूहिक कार्य योजना है जो हमारी वसुंधरा को प्लास्टिक वस्तुओं से उत्पन्न होने वाले कचरे से बचाने का संघर्ष कर रही है जिससे जुडऩे वाले को संगठित कर प्रामाणिक संगठनात्मक पहचान दिलवाने के लिए सहकारी समिति के तौर पर गठित किया जा रहा है जिसका कार्य भार सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता यामिनी मैथिल द्वारा स्वयं सेवक के तौर पर पूरा किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सहकारिता आधारित व्यवस्था स्थापित्व करने के लिए हमारे द्वारा पहल करके एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं के कचरे को जनित होने से रोकना की नागरिक जिम्मेदारी पूरी की जा रही जिसमे सहकारी संस्था के सदस्य के तौर लोग जुड़ रहे हैं परिणाम स्वरूप प्रदूषण नियंत्रण स्वप्रेरित जन जागरूकता स्थापित किया जाना संभव हो सकेगा
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता


