रायपुर। राजधानी से लगे खरोरा से पांच किलोमीटर दूर कोसरंगी गांव में दो किसानों द्वारा मांगुर मछली का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। जिस पर संबंधित विभाग की नजर नहीं है, अगर है भी तो इस अवैध उत्पादन पर रोक नहीं लगाई जा रही है। गांव के लोगों का कहना है कि पुलिस और फिसरी विभाग से कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
गांव वालों ने बताया कि सुखदेव और मनीष ये दो किसान मछली पालन कर रहे हैं और इनके द्वारा मांगुर मछली का उत्पादन किया जा रहा है।छत्तीसगढ़ में प्रतिबंध के बावजूद मांगुर मछली का उत्पादन हो रहा है। इस मामले में पुलिस और फिसरी विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। राज्य में उत्पादन के साथ ही पड़ोसी राज्यों से मांगूर मछली की तस्करी भी बड़े पैमाने पर हो रही है। गृहमंत्री के जिले में मांगुर(मोंगरा) मछली के उत्पादन करने वालों पर कार्रवाई की गई थी लेकिन अन्य जिलों में मांगुर मछली पालन करने वालों पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
30 क्विंटल मांगुर मछली जमीन में दफना कोंडागांव जिले में भी प्रशासन ने दो साल पहले करीब 30 क्विंटल मांगुर मछली को जमीन में दफना दिया था। मांस खाने वाली इस मछली का उत्पादन, परिवहन और सेवन पूरे भारत में बैन है। आंध्र प्रदेश के तस्कर ष्टत्र के रास्ते इस मछली की तस्करी कर रहे थे। बीच रास्ते में ट्रक खराब हुआ और प्रशासन को इसकी खबर मिली। जिसके बाद बीच जंगल में गड्ढा खोदकर एक ट्रक मछली को नष्ट कर दिया गया है। मामला जिले के बोरगांव थाना क्षेत्र का है।


