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Saturday, March 21, 2026
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जल संसाधन के “विशेष-मेहरबानी-प्राप्त”  गड़बड़ी बाज अधिकारी कौन-कौन है ?

पूरब टाइम्स , रायपुर . इन दिनों छ.ग. का जल संसाधन विभाग अपनी अनियमितताओं के कारण चर्चाओं में बना हुआ है . खासकर प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा शिकायतों पर जांच कर , अपने विभाग के दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्यवाही ना कर , कागज़ी कार्यवाही के आधार पर उन्हें बचाना . इसी कारण से लोकायुक्त कार्यालय में विभाग के अधिकारियों के  विरुद्ध प्रकरण दर्ज हुआ है . विदित हो कि सुरक्षा निधि को कार्य समाप्त होने के पूर्व वापस कर देने पर केवल अपने विभागीय अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर कराई गई परंतु ठेकेदारों पर कार्यवाही की केवल अनुशंसा कर इतिश्री करने वाले जल संसाधन विभाग प्रमुख को एक अन्य मामले में मजबूर होकर अनेक ठेकेदारों पर कार्यवाही के लिये मजबूर होना पड़ा पर यहां भी प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा उनपर कार्यवाही करने के लिये पीडब्ल्यूडी विभाग को लिखकर अपने कंधे से ज़िम्मेदारी हटाने का प्रयास किया गया . श्रम कानूनों की अवहेलना करना , प्रशासनिक स्वीकृति को ताक में रखकर काम करना , सत्यनिष्ट संधि को बेमायने बनाना इत्यादि विभाग के अधिकारियों की आदत हो चुकी है जिसका मुख्य कारण मुख्य अभियंता कार्यालय द्वारा जांच व कार्यवाही नहीं होना है . ठेकेदारों व अधिकारियों पर जांच कर उनपर विधिक व अपराधिक कार्यवाही की अनुशंसा न करना , यह किसी प्रलोभन , दबाव या आलस के आदत के कारण है , इसका खुलासा एक ना एक दिन हो ही जायेगा और उन शिकायत व नोटिसों पर कोई एक्शन ना लेने के कारण दोषी उच्चाधिकारी दंडित ज़रूर होंगे , इसी प्रत्याशा के साथ पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..

जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ की जांच कार्यवाही में दोषी ठेकेदारों को प्रमुख अभियंता द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से बचाने के मामले में लोकायुक्त छत्तीसगढ़ के समक्ष परिवाद करके निशा देशमुख और अमोल मालुसरे ने चुनौत दी है . उल्लेखनीय है कि इस परिवाद कार्यवाही में लोकायुक्त कार्यालय के समक्ष सचिव जल संसाधन विभाग द्वारा प्रतिक्रिया नहीं किए जाने से जमानती वारंट जारी किया गया है । उल्लेखनीय है कि, जल संसाधन विभाग और छत्तीसगढ़ शासन के आर्थिक हित रक्षण करने के लिए किए गए परिवाद कार्यवाही में लोकायुक्त कार्यालय द्वारा की गई यह अभूतपूर्व कार्यवाही है ।

श्रमिकों के अधिकार और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करवाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे प्रदेश स्तर पर कार्य करते हुए जल संस्थान विभाग के लगभग 1400 से अधिक ठेका कार्यों में नियोजित श्रमिकों के लिए कार्य कर अनुश्रवण रिपोर्ट तैयार कर रहे है,  जिसके तहत वर्तमान में कार्यपालन अभियंता जल संसाधन संभाग दुर्ग के 35 ठेका कार्यों में नियोजित श्रमिकों की स्थिति पर श्रम आयुक्त छत्तीसगढ़ का संज्ञान कराए जाने पर जांच कार्यवाही प्रक्रिया में आ गई है , जिसके तहत  अधीक्षण अभियंता शिवनाथ वृत्त दुर्ग जल संसाधन विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया है ।

जल संसाधन के मामले में विषय विशेषज्ञ अधिवक्ता यामिनी मैथिल ने बताया कि लोकायुक्त छत्तीसगढ़ के समक्ष परिवाद दाखिल करने के लिए अधिनियमित प्रावधानों में वैसे तो अधिवक्ता की आवश्यकता नहीं है लेकिन अधिनियमित परिवाद कार्यवाहियों में शिकायत वस्तुस्थिति प्रावधानित प्रारूप में होना चाहिए तथा लगाए गए आरोप को आधार देने वाले दस्तावेजों / अभिलेखों का विधिक विश्लेषण को कानूनी प्रावधानों के साथ विश्लेषित किया जाना विधि अपेक्षित है . जल संसाधन के दोष सिद्ध 108 ठेका कार्य के ठेकेदारों को इसी विधि निर्देशानुसार आरोपित कर परिवाद तैयार किया गया है जिसकी प्रारंभिक कार्यवाही में प्रमुख अभियंता को नोटिस देकर प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण परिवाद लोकायुक्त कार्यालय द्वारा स्वीकृति योग्य होने की स्थिति में लाया गया है ।

विगत वर्षों से जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के सचिव और प्रमुख कार्यालय के साथ-साथ मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता कार्यालयों द्वारा जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंताओं के अनियमित कार्य व्यवहार का संरक्षण देने विषयक पदेन प्राधिकार का दुरुपयोग कर अनियमित संरक्षण दिया जा रहा था जिसकी खबर प्रमुखता से छाप कर पूरब टाईम्स अखबार ने प्रशासकीय अधिकारियों को प्रश्नांकित किया. परिणाम स्वरूप जन जागरूकता आई और समाज सेवकों ने 108 ठेका मामले को न्यायालय के समक्ष उठाया जिस पर कड़ी कार्यवाही की जा रहीं हैं।

लोक कर्म विभाग नियमावली के दिशानिर्देश और वित्त निर्देशानुसार सत्यनिष्ठ ठेका अनुबंध शर्तों की अनुपालन कार्यवाही पर रहेगी नजर !

जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ की विभागीय जांच कार्यवाही में 108 ठेका कार्यों के ठेकेदारों को दोषी ठहराया गया था परंतु अंतिम जांच निर्देश में जांच अधिकारियों द्वारा मात्र 14 ठेका कार्यों के ठेकेदारों को तथाकथित तौर पर दोषी बताया गया । इस विषय पर शिकायतकर्ता अमोल मालुसरे ने प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि जांच कार्यवाही में दोषी ठेकेदारों को दोषमुक्त किए जाने की प्रशासकीय कार्यवाही में कुछ महत्वपूर्ण विधिक पहलुओं को नजरअंदाज किया जाना प्रतीत होता है । जिनमें मुख्य है लोक कर्म विभाग नियमावली के अनुसार विभागीय जांच में पकड़ में आए 108 ठेका अनुबंध शर्तों के विपरीत कार्य करने वाले ठेकेदारों को दंडित नहीं किए जाने की कार्यवाही और ठेका अनुबंध शर्तों अनुसार सत्यनिष्ठ संधि के वित्त निर्देश के उल्लंघन करने विषय पर की जा रही अनियमितता विषयक कार्यवाहियों को क्या जांच अधिकारी विधि निर्देशानुसार कर रहें है क्या इस पर नजर रहेगी ।

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