योगाभ्यास से शरीर और मस्तिष्क दोनों ही सेहतमंद रहते हैं। निरंतर अभ्यास से सकारात्मक विचार और ऊर्जावान शरीर प्राप्त किया जा सकता है। वहीं जिन लोगों को कोई रोग या शारीरिक समस्या होती है, वह भी योग के माध्यम से स्थाई इलाज प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि हर समस्या के लिए अलग-अलग प्रभावी योगासन और प्राणायाम है। कई बार योग गुरू बाबा राम देव को कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करते देखा जाता है। वह कहते हैं कि इस योग से कई लाभ मिलते हैं। लोगों को कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास नियमित करना चाहिए। कपालभाति प्राणायाम योग का एक शक्तिशाली श्वसन अभ्यास है जो शरीर को शुद्ध करने और मन को शांत करने में मदद करता है। इसका नाम ‘कपाल’ (माथा) और ‘भाति’ (चमक) से बना है, यानी ऐसा अभ्यास जो आपके चेहरे और मन दोनों में चमक लाता है।
हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें कपालभाति प्राणायाम के अभ्यास से बचना चाहिए।
कपालभाति प्राणायाम के फायदे: कपालभाति प्राणायाम के नियमित अभ्यास से वजन घटाने में मदद मिलती है। जो लोग वेट लूज करना चाहते हैं या जिनकी निकली हुई तोंद है, वह पेट की चर्बी कम करने के लिए कपालभाति करें। इस प्राणायाम के नियमित अभ्याससे पाचन में सुधार होता है। गैस, कब्ज और अपच जैसी पेट संबंधित समस्याओं से राहत दिलाने में यह असरदार है।
फेफड़ों को मजबूत करने और श्वसन क्षमता बढ़ाने के लिए कपालभाति प्राणायाम का नियमित अभ्यास करें। कपालभाति प्राणायाम तनाव कम करता है। यह मानसिक स्पष्टता और शांति लाता है। इस प्राणायाम से रक्त संचार बेहतर होता है जिससे स्किन का ग्लो बढ़ता है और त्वचा में निखार आता है।
किसे करना चाहिए और किसे नहीं: कपालभाति प्राणायाम वैसे तो हर उम्र और लिंग के लोग कर सकते हैं। लेकिन कुछ स्थितियों में इस प्राणायाम के अभ्यास से बचना चाहिए। अगर आपको सांस या हृदय से जुड़ी कोई गंभीर समस्या हो तो कपालभाति के अभ्यास से बचें। वहीं गर्भवती महिलाओं, उच्च रक्तचाप के मरीज, हृदय रोगी और हर्निया या पेट की सर्जरी वाले लोगों को कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
कपालभाति के अभ्यास का सही तरीका और समय: कपालभाति का अभ्यास सुबह खाली पेट करना चाहिए। अगर सुबह प्राणायाम नहीं कर सकते हैं तो खाने के तीन घंटों के अंतराल पर ही कपालभाति प्राणायाम करें। इसके अभ्यास के लिए सीधी रीढ़ के साथ आराम से बैठें। अब नाक से तेज सांस छोड़ें और पेट को अंदर खींचें। इस दौरान सांस लेने की प्रक्रिया स्वाभाविक रखें। इस प्रक्रिया को रोज पांच से 10 मिनट से शुरुआत करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।


