प्रदूषण के चिंताजनक मामले हमारे आसपास बेहद खतरा उत्पन्न कर रहें है ?
आबादी क्षेत्र से नागरिकों द्वारा जनित होने वाले कचरे का हिसाब किताब कहां हैं ?
चिकित्सा व्यवसाइयों द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले कचरे का निपटान कैसे होता है ?
औद्योगिक इकाइयों की गतिविधियों से प्रदूषित होने वाले पर्यावरण को बचाने के उपाय क्या है ?
पूरब टाइम्स , भिलाई , रायपुर . विश्व स्तर पर प्रदूषण के कारण गम्भीर समस्याएं उत्पन्न होने लगी हैं . जैसे जलवायु में परिवर्तन , ओज़ोन लेयर में छेद होना , वातावरण बेहद दूषित होना इत्यादि . इसके लिये पूरे विश्व स्तर से , देश के स्तर , प्रांत के स्तर व प्रदेश में बांटे गये पर्यावरण के क्षेत्रीय स्तर पर मॉनिटरिंग के लिये कार्यालय व कर्मचारी हैं . इन क्षेत्रीय कार्यालयों के अधीन , उस क्षेत्र के नगर निगम , नगर पंचायत , परिषद व ग्राम पंचायतों को , उस इलाके में प्रदूषण से बचाव करना है . जिसमें ठोस, तरल , वायु व औद्योगिक कचरों से होने वाले प्रदूषण को न्यूनतम कर, पर्यावरण को बचाना होता है . हर नगर निगम को उनके क्षेत्र के ठोस कचरे , बायो मेडिकल वेस्ट व खतरनाक क्षेणी के कचरे के निष्पादन को करवाने व मॉनिटरिंग कर , क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से प्रदेश के पर्यावरण संरक्षण मंडल को सालाना रिपोर्ट देनी होती है . इसी तरह से हर विधायक का यह दायित्व होता है कि वह अपने क्षेत्र के पर्यावरण व लोगों की सुरक्षा के लिये , अपने क्षेत्र में होने वाले कचरे के निष्पादन की निगरानी व जानकारी रखे . भिलाई, रिसाली , बीरगांव , रायपुर इत्यादि निगमों में बड़े उद्योग व बड़े हॉस्पिटल होने के कारण इन क्षेत्रों के विधायकों की कचरे व प्रदूषण मामले में जनता के प्रति जवाब देही और ज़्यादा होती है . क्या ये विधायक अपनी ज़िम्मेदारियों को अच्छे से निभा रहे हैं ? जनता से इस यक्ष प्रश्न के साथ पूरब टाइम्स की यह खबर …
छत्तीसगढ़ के नगरीय ठोस अपशिष्ट का हिसाब किताब नगरीय निकाय छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को कब देगें ?
छत्तीसगढ़ के नगरीय मानव जनित कचरे का क्या करते हैं इसकी जानकारी अभी तो छत्तीसगढ़ के किसी भी नगरी निकाय ने सर्व साधारण की जानकारी में लाने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की है लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है की छत्तीसगढ़ का पर्यावरण संरक्षण मंडल प्रदेश के नगरीय निकायों से जनित होने वाले नगरीय ठोस आपशिष्ठ का वार्षिक प्रतिवेदन और प्रत्येक नगरीय निकाय में लोक स्वास्थ्य की स्थिति क्या है इसके तथ्यात्मक आंकड़े सार्वजनिक नहीं करके पर्यावरण अधिनियम के विधि निर्देश का उलंघन कर रहे है जिसके कारण छत्तीसगढ़ के पर्यावरण संरक्षण की कार्य योजनाओं महज दिखावा साबित हो रहीं है
संक्रामक बीमारियों को आबादी क्षेत्र में फैलाने वाले चिकित्सा व्यवसायियों पर स्थानीय प्रशासन की कृपा दृष्टि क्यों है ?
भारत ही नहीं पूरे विश्व मे कारोना महामारी की भयावाह स्थिति विगत वर्षों में बनी रही छत्तीसगढ़ भी लगभग एक वर्ष से ज्यादा समय के लिए बंद रहा ऐसी विपरित स्थिति में छत्तीसगढ़ का पर्यावरण विभाग क्या कर रहा था यह सभी जानना चाहते थे लेकिन नगरीय प्रशासन और पर्यावरण इन दोनो विभागों की कार्यवाही में पारदर्शिता नहीं होने के कारण दोनो विभाग महामारी के प्रकोप कार्यकाल में अपना पदेन दायित्व पूरा नहीं कर पायें क्योंकि महाबंद की स्थिति को नियंत्रित नहीं किया जा सका इसलिए यह आरोप लगाए जाने का आधार बनता है की दोनों विभाग लोक स्वास्थ्य को बचा नही पाए गैर तलब रहे की मामला चिंतनीय है अतः स्वाभाविक है कि दोनों विभागों के अधिकारियों के पदेन जिम्मेदारी के निर्वहन कार्यवाही को प्रश्नांकित किए जानें पर दो मत नहीं होना चाहिए .
औद्योगिक इकाइयों द्वारा प्रदूषण फैलाने की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए छत्तीसगढ़ का उद्योग एवं पर्यावरण विभाग क्या कर रहा है ?
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक इकाइयों की बढ़ती संख्या एक तरफ हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का कार्य कर रहीं है वहीं दूसरी ओर हमे इस चिंताजनक स्थिति का सामना भी ये औद्योगिक इकाइयां करवा रही है की छत्तीसगढ़ के पर्यावरण को औद्योगिक इकाइयों के द्वारा पहुंचाई जा रहीं अपूर्णीय क्षति को कैसे नियंत्रित किया जाय उल्लेखनीय है की छत्तीसगढ़ के पर्यावरण की निगरानी करने के लिए विधि द्वारा कई अधिनियमित प्रावधान स्थापित किया गया है जो पर्यावरण संरक्षण के लिए की जाने वाली सभी कार्यवाहियों को सुनिश्चित करवाने के लिए जवाबदार है लेकिन विडंबना यह है कि छत्तीसगढ़ का पर्यावरण विभाग औद्योगिक इकाइयों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण की निगरानी करके वास्तविक आंकड़ों को जनता को नहीं बता रहा है ।
पर्यावरण संरक्षण करने के लिए चौतरफा कार्य योजना बनाकर उसमें जन सामान्य की सक्रिय भागीदारी बनाया जाना आवश्यक है । स्वच्छता अभियान जन भागीदारी का उल्लेखनीय उदाहरण है लेकिन बायोमेडिकल और औद्योगिक कचरे के साथ साथ प्लास्टिक और ई वेस्ट पर नगरीय निकायों और पर्यावरण विभाग उदासीन कार्य व्यवहार कर रहे हैं जिसके लिए इन दिनों विभागों को अपनी विभागीय जिम्मेदारी पूरी करनी होगी
अमोल मालुसरे,सामाजिक कार्यकर्ता


