हेपेटाइटिस का संक्रमण हमारी सेहत को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है। ये लिवर को प्रभावित करने वाली समस्या है जिसके कारण लिवर में इंफ्लेमेशन होने का जोखिम बढ़ जाता है। हेपेटाइटिस का संक्रमण अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों हो सकता है और इसकी गंभीर स्थित में लिवर डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
हाल के दिनों में हेपेटाइटिस-ए संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए गए हैं। ये एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो हेपेटाइटिस ए वायरस (एचएवी) के कारण होती है। ये मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के मल और दूषित भोजन या पानी के कारण फैलता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन स्थानों पर स्वच्छता की कमी होती है वहां इस प्रकार के संक्रमण का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। ये संक्रामक रोग कितना खतरनाक है और इससे किस प्रकार के जोखिम हो सकते हैं, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हेपेटाइटिस -ए दुनियाभर में हर साल लगभग 1.4 मिलियन (14 लाख से अधिक) लोगों को प्रभावित करता है। भारत जैसे विकासशील देशों में, जहां विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई की कमी है, वहां इसका संक्रमण अधिक पाया जाता है। हालांकि सरकार ने स्वच्छता अभियान चलाया जिसके परिणामस्वरूप पहले की तुलना में अब इस रोग का जोखिम कम देखा जा रहा है।
संक्रमण होता कैसे है?
हेपेटाइटिस ए आमतौर पर साफ-सफाई की कमी, दूषित खाना-पानी और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक अस्पताल में गैस्ट्रोइंटस्टाइनल विभाग के डॉक्टर भूषण आनंद बताते हैं पांच चीजें हैं जो इस संक्रामक रोग को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिससे बचाव करते रहना जरूरी है। दूषित पानी पीने, ठीक से न पके भोजन (खासकर स्ट्रीट फूड), संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन या टॉयलेट साझा करने, बिना हाथ धोए खाना खाने से और जिन स्थानों पर इस संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं वहां हेपेटाइटिस ए का खतरा अधिक रहता है। इन पांचों स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इससे बचाव करते रहना चाहिए।
इस संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?
हेपेटाइटिस-ए को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। शुरुआत में ये आम फूड पॉइजनिंग जैसा लगता है, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आपके लिवर को स्थाR नुकसान पहुंचा सकता है। इस संक्रामक रोग से बचे रहने के लिए वैक्सीनेशन एक बेहतर तरीका है। इसके अलावा शुद्ध, उबला हुआ पानी पीना चाहिए। भोजन से पहले और शौच के बाद हाथ धोना और सड़क किनारे का खाना खाने से बचना बहुत आवश्यक है।


