छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के हित को सर्वोपरि मानते हुए चिकित्सा प्रवेश नियमों में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। यह निर्णय राज्य के हजारों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए राहतभरा और समान अवसर प्रदान करने वाला साबित होगा।
मुख्य सुधार बिंदु:
- राज्य कोटे की सीटों में स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था को और पारदर्शी बनाया गया है।
- डोमिसाइल नीति में स्पष्टता लाकर बाहरी छात्रों के अनुचित लाभ पर रोक लगाने की दिशा में अहम पहल की गई है।
- आरक्षित वर्गों, पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रवेश में विशेष प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।
- प्रवेश प्रक्रिया में डिजिटल व पारदर्शी प्रणाली को और सुदृढ़ किया गया है, जिससे किसी भी प्रकार की धांधली की संभावना नगण्य हो जाएगी।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य:
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “हमारी सरकार का उद्देश्य यही है कि छत्तीसगढ़ के होनहार युवाओं को चिकित्सा शिक्षा में उचित स्थान और समान अवसर मिलें। यह सुधार राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।”
शिक्षा विभाग की सराहना:
इस सुधार के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और तकनीकी समिति को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नए नियमों को जल्द से जल्द लागू करें और छात्रों को पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं।
छात्रों और अभिभावकों में उत्साह:
इस निर्णय से राज्य भर के मेडिकल के छात्र व उनके अभिभावकों में खुशी और विश्वास का माहौल बना है। छात्र संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इसे छात्रहित में क्रांतिकारी कदम करार दिया है।
यह निर्णय न सिर्फ शैक्षणिक अवसरों को संतुलित करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को राज्य के मेडिकल संस्थानों में स्थायी पहचान और भविष्य सुनिश्चित करेगा


