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Friday, March 20, 2026
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लोकायुक्त जांच के घेरे में कैसे आया जल संसाधन विभाग ?

पूरब टाइम्स , रायपुर . छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग पर पिछले कुछ महीनों में अनेक अनियमितताओं के आरोप लगे . साथ ही भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में प्रमुख अभियंता इत्यादि उच्चाधिकारियों के पास शिकायतें भी की गईं . परंतु ना ही आरोपों पर कोई स्पष्टीकरण दिया जाता था और ना ही शिकायतों पर कार्यवाही की जाती थीं . ऐसे ही विभाग के दुर्ग सर्कल सहित कई शिकायतों के मामलों को पूरब टाइम्स ने भी प्रमुखता से छाप कर , उसे तत्कालीन प्रमुख अभियंता आई. के. उइके को , बाकयदा लिखित में संज्ञान भी करवाया परंतु उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया . सूत्रों से ज्ञात यह भी हुई कि प्रमुख अभियंता व उनके संरक्षण के कारण अनेक अधिकारियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे डंके की चोट पर , नियमानुसार अपने कार्यालय में रिकॉर्ड नहीं रखने का दम भरने लगे थे, साथ ही विधानसभा में भी अपूर्ण व गलत जानकारी देने लगे थे . समाज सेवियों व शिकायतकर्ता के दबाव में अंततः विभाग के एक कार्यपालन अभियंता पर एफआईआर कराना पड़ा . यहां पर भी लाभार्थी ठेकेदार को बचा दिया गया और अन्य जगहों की जांच नहीं की गई . फिर कुछ विसिल ब्लोवर ने मय कागज़ात प्रमुख अभियंता आई के उइके सहित अनेक अधिकारियों की शिकायत लोकायुक्त में कर ली. प्रथम जांच के बाद लोकायुक्त कार्यालय ने मामला दर्ज कर लिया . अब देखने वाली बात यह होगी कि पिछले माह उक्त प्रमुख अभियंता के रिटायर होने के बाद नव पदस्थ प्रमुख अभियंता , विभाग की कार्यशैली में बदलाव लाते हैं या फिर भ्रष्टाचार में लिप्त कुछ अधिकारियों की लॉबी के दबाव में काम करते हैं . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट …

छत्तीसगढ़ विधानसभा प्रश्नोत्तरी-सूचि दिसम्बर 2024 सत्र, सोमवार दिनांक 16 दिसम्बर 2024 भाग 1 तारांकित प्रश्नोत्तर प्रश्न क्रम 31. (*क्र. 214) से प्रश्नकर्त्ता विधायक धर्मजीत सिंह द्वारा पूछा गया विधानसभा प्रश्न कि, जल संसाधन विभाग द्वारा निविदा में हस्तगत कार्य को छिपाकर दूसरी निविदा डालने पर की गई विभागीय कार्यवाही की जानकारी दें इस प्रश्न का छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन के विसंगतिपूर्ण प्रतीत होने वाले उत्तर दिया गया जिसे सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे द्वारा प्रश्नांकित किया गया ।  जिसके बाद तत्कालीन प्रमुख अभियंता ने अपनी गलतियों को छिपाने का कूटनीतिक प्रयास किया परंतु तर्कसंगत विधिक पहल कर सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा प्रमुख अभियंता के अनियमित कार्याचरण की मंशा को विफल कर
दिया है ।

विधानसभा प्रश्न का उत्तर देने के बाद जब दोषी ठेकदारों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ हुई तो तत्कालीन प्रमुख अभियंता ने दोषी ठेकेदारों को बचाने के लिए विधि विरुद्ध शासकीय आदेश जारी किए जाने वाली विधि विरुद्ध कार्यवाही करते हुए जल संसाधन सचिवालय को गैर तर्क संगत पत्र लिखा जिसके कारण भ्रमित परिस्थिति में सचिवालय ने विधि विरुद्ध कार्यवाही प्रक्रिया कर दोषपूर्ण आदेश जारी किए जिससे कि विभागीय जांच से आरोपी बनाए गए ठेकेदारों को बचाने का कुटिल अवसर दोषी ठेकेदार को मिले लेकिन जागरूक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सूचना नोटिस देकर आपत्ति दर्ज करवाई तो जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा जारी आदेश की एक त्रुटि को संशोधन आदेश से बदल दिया और बचने का प्रयास किया ।

प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग द्वारा विभागीय जांच में दोषी ठहराए गए ठेकेदारों को बचाने के लिए विधि विरुद्ध प्रशासकीय कार्य व्यवहार करके दोषपूर्ण शासनादेश निकला था जिसके लिए सूचना नोटिस देने के बाद भी प्रमुख अभियंता ने शासन हित को क्षति पहुंचाई इसलिए इस अनियमित कार्य व्यवहार की शिकायत लोकायुक्त छत्तीसगढ़ से की गई जिस पर संज्ञान लेकर लोकायुक्त ने विविध प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही प्रारंभ कर दी है जो कि प्रदेश में विभागीय अनियमितता के विरुद्ध की जाने वाली अभूतपूर्व कार्यवाही है ।

छत्तीसगढ़ में लोकायुक्त कार्यालय शासकीय विभागों की अनियमितताओं विषयक शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेकर कार्यवाही करता है इसलिए जागरूक रहकर विभागीय गड़बड़ियों की जानकारी मिलते ही लोकायुक्त छत्तीसगढ़ के संज्ञान में लाया जाना चाहिए।
अमोल मालूसरे , सामाजिक कार्यकर्ता

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