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Friday, March 6, 2026
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सावन में दूध और दही क्यों नहीं खाना चाहिए जानें वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण

सावन का महीना हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह भगवान शिव को समर्पित मास होता है, जिसमें भक्त उपवास, पूजा और खास नियमों का पालन करते हैं। इस दौरान खान-पान को लेकर भी कई परंपराएं और नियम बनाए गए हैं, जिनमें दूध, दही और उससे बनी चीजों जैसे कढ़ी और रायता का सेवन वर्जित बताया गया है।

अब सवाल यह है कि आखिर सावन में कढ़ी और दही क्यों नहीं खानी चाहिए? इसका क्या धार्मिक और वैज्ञानिक कारण है? आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं।

धार्मिक मान्यता क्या कहती है?
भगवान शिव को कच्चा दूध अर्पित किया जाता है
सावन में शिवजी की पूजा में कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा है। इसी कारण इस महीने में दूध और उससे बनी चीजों को खाने की मनाही होती है। माना जाता है कि जो चीजें भगवान को अर्पित की जाती हैं, उन्हें आमतौर पर उस समय स्वयं नहीं खाना चाहिए।

दही और कढ़ी वर्जित
चूंकि कढ़ी दही से बनाई जाती है, इसलिए यह भी इस नियम में शामिल है। धार्मिक ग्रंथों में भी सावन मास में दही और उससे बनी चीजों को वर्जित बताया गया है।

वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण क्या हैं?
पाचन तंत्र कमजोर होता है: आयुर्वेद के अनुसार, सावन के मौसम में शरीर की पाचन शक्ति (डाइजेशन) कमजोर होती है। ऐसे में दही और कढ़ी जैसी खट्टी चीजें खाना गैस, अपच और एसिडिटी की समस्या पैदा कर सकता है।

वात दोष बढ़ सकता है:दही में वात (वायु तत्व) को बढ़ाने वाले गुण होते हैं, जिससे इस मौसम में जोड़ों का दर्द, पेट में गैस और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

बारिश में दूध की गुणवत्ता पर असर: सावन में बारिश अधिक होती है, और इस दौरान घास, कीड़े-मकोड़े, नमी की वजह से गाय-भैंस जो घास चरती हैं, उसका सीधा असर उनके दूध की गुणवत्ता पर पड़ता है। यह दूध और उससे बनी चीजें शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

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