• 27-02-2024 07:00:54
  • Web Hits

Poorab Times

Menu

देश

राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- 124 A के तहत जेल में बंद लोग जमानत के लिए कोर्ट में जाएं

पूरब टाइम्स।  राजद्रोह कानून को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि जो लोग इस कानून की धारा 124 A के तहत जेल में बंद हैं वे जमानत के लिए कोर्ट में जाएं. इससे पहले सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार पुलिस को देशद्रोह के प्रावधान के तहत संज्ञेय अपराध दर्ज करने से नहीं रोक सकती, लेकिन एक सक्षम अधिकारी (SP रैंक) की संस्तुति के बाद ही 124A के मामले दर्ज किए जाएं. ऐसा किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि लंबित राजद्रोह के मामलों की समीक्षा की जा सकती है. 124 A के तहत दर्ज मामलों में जल्द से जल्द जमानत देने पर विचार किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को लेकर तीन अहम बातें कही. पहला फिलहाल कोई मुकदमा इस मामले में दर्ज नहीं होगा. दूसरा पेंडिंग मामलों में जो मुकदमे इस धारा के तहत दर्ज है उन्हे ठंडे बस्ते में रखा जाएगा. ये सारे आदेश तब तक लागू रहेंगे जब तक कोर्ट कोई अगला आदेश न दे या फिर सरकार इस पर कोई फैसला न ले ले.
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला देते हुए राजद्रोह कानून के तहत कोई नया केस दर्ज करने पर रोक लगा दी. चीफ जस्टिस एनवी रमण की बेंच ने केंद्र सरकार को देशद्रोह कानून धारा 124A पर पुनर्विचार करने की इजाज़त देते हुए कहा कि इस प्रावधान का उपयोग तब तक करना उचित नहीं होगा. जब तक कि इस पुनर्विचार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती. उन्होंने उम्मीद जताई कि 124 ए पर फिर से विचार की प्रक्रिया पूरी होने तक न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार इसके तहत केस दर्ज करेगी. कोर्ट ने ये भी कहा कि जो लोग 124 A के तहत जेल में बंद हैं, वो जमानत के लिए कोर्ट में जाएं.

केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की एक पीठ को बताया कि राजद्रोह के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करना बंद नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह प्रावधान एक संज्ञेय अपराध से संबंधित है और 1962 में एक संविधान पीठ ने इसे बरकरार रखा था. केंद्र ने राजद्रोह के लंबित मामलों के संबंध में न्यायालय को सुझाव दिया कि इस प्रकार के मामलों में जमानत याचिकाओं पर शीघ्रता से सुनवाई की जा सकती है, क्योंकि सरकार हर मामले की गंभीरता से अवगत नहीं हैं और ये आतंकवाद, धन शोधन जैसे पहलुओं से जुड़े हो सकते हैं.

Add Rating and Comment

Enter your full name
We'll never share your number with anyone else.
We'll never share your email with anyone else.
Write your comment
CAPTCHA

Your Comments

Side link

Contact Us


Email:

Phone No.